पहाड़ी भाषा दी नौई चेतना .

Sunday, June 16, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-7





अपणिया भासा च समाज दे बारे चसमाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाला जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखा दे हन। इसा माळा दा पैह्ला मणका असां कुछ चिर पैह्लें पेश कीता था। फिरी पहाड़ी भाषा पर चर्चा चली पई। हुण एह लेखमाला फिरी सुरू कीती है। छे लेख तुसां पढ़ी लै, अज पढ़ा इसा लेखमाळा दा सतुआं मणका।




डा. अंबेदकरा रे योगदान, तिन्हारी राजनीतिक विचारधारा होर राजनीतिक प्रयोग

अंबेदकरा रा योगदान क्या हा जाति उन्मूलना रे आंदोलना बिच? ये समझी के हे आसे अग्गी बधी सकाहें। अंबेदकरा रे राजनैतिक दर्शना री भूमिका क्या थी, तिन्हा रे दर्शना री पृष्ठभूमि क्या थी होर तिन्हारी राजनैतिक रणनितियां क्या थी जाति उन्मूलना रे बारे बिच। आसौ लगहां भई अंबदकरा रे सभी थे बडे दो योगदान थे। पैहला था दलित आबादी बिच आत्मगरिमा रा बोध पैदा करना। हालांकि एता कठे फुले, पेरियार, अयंकाली समेत कम्युनिस्टां री भूमिका बी थी। पर अंबदकरा रा विशेष स्थान इधी कठे बणी गया क्योंकि स्यों पैहले दलित स्कॉलर थे ज्यों इतनी हदा तक शिक्षित थे। दूजा कारण ये था भई जाति रे प्रश्ना रे कई पहलुआं जो जेस जोरा के तिन्हें रेखांकित कितेया खास तौरा पर जेता रे बारे बिच आनंद तेलतुमडे बी ठीक लिखिहाएं से था दलिता रा सिविल होर डेमोक्रिटिक राइट यानि तिन्हारे नागरिक होर जनवादी अधिकारा रे प्रश्ना जो जेस तरीके के ऱेखांकित कितया होर एताजो विशिष्टता दिती। इधी कठे तिन्हा रा योगदान एकी रूपा के विशिष्ट बणहां। अंबेदकरा रा दूजा प्रमुख योगदान था राष्ट्रीय आंदोलना रे एजेंडे पर जाति रे प्रश्ना जो जोरा के स्थापित करना। हालांकि कम्युनिस्ट पार्टिये बी 1927-28 बिच इन्हा प्रश्ना रे बारे बिच प्रस्ताव पारित किते थे। पर अंबेदकर एते पैहले ले सक्रिय थे। सन 1919 ई. बिच स्यों साउथब्युरो कमेटी रे सामहणे आपणी टेस्टीमनी यानि ब्यान देहाएं। ये तिन्हारा भारता बिच पैहला राजनैतिक कदम था। इन्हां दोनों योगदाना के अंबेदकरा रा जाति उन्मूलना रे आंदोलना बिच एक बडा स्थान बणहां। तिन्हा रे जाति उन्मूलन आंदोलना रे प्रति सरोकार जीवन भर बणीरे रैहाएं। महाड जाति बिच पैदा हुणे रे करूआं तिन्हा जो भेदभावा रा शिकार हुणा पौहां। विदेशा बिच बडी-2 डिग्रियां लैणे रे बावजूद बी तिन्हा जो भेदभाव झेलणा पौहां। एता के तिन्हारे सरोकार होर चिंता ज्यादा मजबूत हुंदी जाहीं। स्यों अमेरिका री कोलंबिया युनिवर्सिटी पढ़े जे प्रैगमेटिसम यानि व्यवहारवादा रा गढ़ था। इथी जॉन ड्युई समेत बडे-2 प्रैगमैटिस्ट दार्शनिक थे। इथी व्यवहारवादा री एक अमिट छाप अंबेदकरा पर पई।

अंबेदकरा री आलोचना आसा जो कि नीं करनी चहिए? अंबेदकरा बिच बौहत सारे अंतर्विरोध हे। स्यों अतंर्विरोधी गल्ला करदे हुए चलहाएं। पर ये अंतर्विरोध निरंतर चलदा रैहां। एताजो आसे कंसिस्टेंट इनकंसिस्टेंसी ऑफ प्रैगमेटिसम बोल्हाएं। व्यवहारवादा री निरंतरतापुर्ण अनिरन्तरता। ये अनिरन्तरता रणकौशला रे कठे ता ठीक हुई सकहाईं पर विचारधारा रे मामले बिच ये गल्ल गल्त हुआईं। विचारधारा जो दांवपेचा रा मसला नीं बनाया जाई सकदा। दूजी गल्ल अंबेदकरा रे ईरादेयां पर कधी गल्ल या आलोचना नीं किती जाई सकदी। तिन्हारे इरादेयां बिच कोई खोट नीं था। तिन्हें कधी बी लेणदेणा कठे होर भौतिक लाभा कठे कोई पद नीं लितेया। तिन्हारा पद लेणे रा मकसद सिर्फ दलिता कठे योगदान करना हे हुआं था। इधी कठे तिन्हारी मंशा पर गल्ल नीं करनी चहिए। मंशा पर गल्ल करने री बजाय आसौ जो राजनैतिक व्यक्ति, संगठन होर आंदोलना री गल्ल करनी चहिए। आसौ गल्ल करनी चहिए भई अंबदकरा रा राजनैतिक होर विचारधारात्मक स्टैंड क्या था। अंबेदकरा री राजनैतिक होर विचारधारात्मक अवस्थिति रा मूल्यांकन करदे वक्त एक चीज ध्याना बिच रखी जाणी चहिए जे तिन्हें आपु बोली थी, तिन्हारे शिष्य के एम कदम बोली थी, तिन्हारी जीवनी लिखणे वाले खैरमोडे बोली थी होर तिन्हारी दूजी पत्नी सविता अंबेदकरे बोली थी। अंबेदकर उम्र भर एक निरंतर ड्युईवादी व्यवहारवादी थे। जॉन ड्युई तिन्हारे अध्यापक थे कोलंबिया विश्वविद्यालय बिच। जॉन ड्युई रे विचार होर तिन्हारी शिक्षा रा युवा अंबेदकरा पर बौहत डुग्घा असर पया। जॉन ड्युई री विचारधारा जो व्यवहारवादा रे नावां ले जाणेया जाहां। अंबेदकरे बोल्या था भई स्यों आपणे समस्त बौद्धिक जीवना कठे जॉन ड्युई रे ऋणी हे। तिन्हारे शिष्य के एम कदम बोल्हाएं भई अगर अंबदकरा जो समझणा हो ता तुसा जो ड्युई जो समझणा पौणा। खैरमोडे भी एहडाहे बोलहाएं। सविता अंबेदकर बोल्हाईं भई जॉन ड्युई री क्लासा मंझ बैठणे रे 30 साल बाद बी अंबेदकर आपणे भाषणा होर वक्तव्या बिच जॉन डयुई री क्लास रूमा रे मैनरिज्मा रा अनुसरण करहाएं थे। जॉन ड्युई री विचारधारा अंबदकरा रे राजनैतिक कार्यक्रमा, रणनितियां होर तिन्हारे राजनैतिक जीवना पर लागू हुआईं थी। अंबेदकरे आपणे दार्शनिक मूल्या, राजनैतिक विचारधारा होर राजनैतिक प्रयोग बिच डयुईवाद व्यवहारा बिच उतारेया।

डा. जेफरलोट क्रिस्टोबे री कताब डा. अंबेदकर एंड अनटचेबिलिटी बिच स्यों अंबेदकरा री चार राजनैतिक रणनीतियां रे बारे बिच दसहाएं। जेता मंझ पैहली रणनीति थी अस्मिता निर्माण। अंबेदकरे समाज बिच ग्रेडेड अनइक्वलिटी यानि संस्तरीकरणबद्ध असमानता रे लक्षणा री पैहचाण कीती। एस पहचाणा बाद स्यों अश्पृश्य होर शुद्रा जो एकी मंचा पर ल्याउणे री कोशीश करहाएं। तिन्हारे कोलंबिया युनिवर्सिटी रा पेपर था कास्टः मैकेनिसम, जेनेसिस, डिवेलपमेंट। एता बिच स्यों जाति व्यवस्था रे उदभवा रा सिद्धांत देहाएं। स्यों बोल्हाएं भई ब्राह्मणे आपणे बिच सजातिय ब्याह स्थापित कितेया। बाकी समाजा पर तिन्हें सजातिय ब्याह थोपेया नीं पर स्यों तिन्हे लंबी प्रक्रिया बिच सहमत करी लिते भई ब्राह्मणा रे मूल्य, परंपरा होरियां ले श्रेष्ठ ही। इधी करूआं होरी समूहे बी सजातिय ब्याह स्वीकार करी लितेया। एता के वर्ण व्यवस्था रा जन्म हुआ। पर तेबे ये सवाल पैदा हुआं भई ब्राह्मण किने पैदा किते। अगर ब्राह्मणा री उत्पति रा कोई सिद्धांत न देई पाओ तो आसे विरोधाभासा बिच पई जाहें। तिन्हारी कताब आवहाईं व्हू वर शुद्रास। तेता बिच स्यों सिद्धांत देहाएं भई शुद्र सुर्यवंशी क्षत्रिय थे। तिन्हारा ब्राह्मणा के अंतर्विरोध था। तेता करूआं ब्राह्मणे तिन्हा जो उपनयन संस्कार देणे ले इंकार करी दितेया। तेता री वजह के स्यों द्विज नीं बणी पाये होर शुद्र बणी गए। पर जाहिर जेह गल्ल ही भई ये सिद्धांत एतिहासिक शोद्धा रे मुताबिक ठीक नीं ठैहरदा। तरीजी रचना तिन्हारी आई, अनटचेबलः व्हू वर दे एंड हाउ दे बिकम अनटचेबल। एता बिच स्यों बोल्हाएं भई बौध धर्मा रे उदय हुणे ले कुछ जातियें बौद्ध धर्म अपनाया। यों जेबे अधीनस्थ हुई होर आर्यां जेबे यों जातियां आपणे राज्या ले बाहर धकेली दिती ता तिन्हा बिच विखंडन पैदा हुआ। अंबेदकर ब्रोकन मैन (जिथी ले दलित शब्द निकलेया) शब्दा रा प्रयोग करहाएं इन्हां कठे। यों ब्रोकन मैन 6वीं सदी ई.पू. बिच जेबे बुद्धे प्रवचन देणा शुरू किते थे ता ये सभी ते पैहले बौद्ध बणे होर तेबे तका बौद्ध रैहे जेबे तका बौद्ध धर्म कुचली नीं दितेया गया। पर यों तेबे बी मांस भक्षण करदे रैहे। एता के चिढ़ी के ब्राह्मणे तिन्हा पर अश्पृश्यता लगाई दिती। हालांकि प्रतिक्रिया बिच इन्हारी जातियें बी ब्राह्मण बहिष्कृत करी दिते। एता के अश्पृश्यता रा जन्म हुआ। पर अंबेदकरा री ये गल्ल बी एतिहासिक प्रमाणा री रोशनी बिच साबित नीं हुंदी। क्योंकि इतिहासिक स्रोता रे मुताबिक ब्राह्मण ता आपु बी 10वीं सदी ई. तका मांस भक्षण करी करहाएं थे। होर बौद्ध धर्मा मंझ ता मांस भक्षणा री साफ मनाही थी होर मांस भक्षणा वाले हीन दसीरे। दरअसल अंबेदकरा रा सारा इतिहास लेखन दरअसल इतिहास लेखन नीं हा बल्कि से राजनैतिक लेखन हा। अंबेदकरे एक एहडी पहचान दिती जेता बिच शुद्र होर दलित जातियां जो जोडी दितेया जाए ता भारता री जनता रा बहुमत बणी जाहां। ये अस्मिता निर्माणा कठे राजनैतिक कवायद थी जेता कठे स्यों एहड़ा इतिहास लेखन करहाएं। जेफरलोट होर गेल ओमवड्थ बोल्हाएं भई कुछ अपूर्ण रचना मंझ अंबेदकर लिखाहें भई ब्रिटिश प्रशासके जाति री उत्पति रे नस्लवादी सिद्धांत दिते थे। यों सिद्धांत अंबेदकरे सिरे ले खारिज किते थे। आपणे आखरी समया बिच अंबेदकर ग्रांड रेसियल थ्युरी ऑफ ओरिजन ऑफ कास्टा पर काम करी करहाएं थे। गेल ओमवड्थ बोल्हाएं भई अंबेदकर एसा थ्युरी बिच दसहाएं भई हिंदू भारता री मुस्लिम विजया या ब्रिटिश विजया ले काफी पैहले बौध भारता पर हिंदू विजय हुई थी। स्यों मौर्य राजेयां होर अशोका जो नागा राजा रे तौरा पर यानि मूल निवासी रे तौर पर रखहाएं होर अशोका रे विराट रूपा रा निर्माण करहाएं जे नागा राजा रे रूपा बिच बौद्ध धर्मा जो कायम रखणे वाला हा। अंबेदकर एसा थ्युरी जो विकसित करने री सोची करहाएं थे।

अंबेदकरा री दूजी रणनीति थी चुनावी होर संगठनात्मक। सन 1919 ई. बिच साऊथब्युरो कमेटी आवाहीं। ये कमेटी मौंटग्यु चेम्सफोर्ड सुधारा रे तहत गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919 बिच चुनावी मताधिकार तय करने से मकसद ले आईरी थी। अलग-2 संगठना जो कमेटी सामहणे आपणे प्रस्ताव रखणे कठे बुलाया जाई करहां था। दलिता रा प्रतिनिधित्व करदे हुए अंबेदकर बी एसा कमेटी सामहणे गए होर तिन्हें दो गल्ला रखी कमेटी सामहणे। तिन्हें बोल्या भई हिंदू समाजा री विभाजक रेखा ही स्पर्श किते जाणे वाले लोक होर अश्पृष्य लोक। तिन्हें बोल्या भई एस लिहाजा ले अश्पृष्य अल्पसंख्यक हे इधी कठे चुनावा बिच या ता तिन्हा जो रिजर्व सीटा दिती जाए या फेरी अलग निर्वाचन क्षेत्र दितेया जाए। दूजा कदम था अंबेदकरा रा बहिष्कृत हितकारिणी सभा रा घोषणा पत्र। एस सभा रे गठना रा तिन्हारा मकसद था दलित आबादी मंझ शैक्षणिक होर सांस्कृतिक काम करना। सन 1927 बिच अंबेदकर साइमन कमीशना रे सामहणे प्रस्ताव रखहाएं भई तिन्हा जो अलग मतदान क्षेत्र दितेया जाए या फेरी रिजर्व सीटा दिती जाए जेता बिच सभी दलिता जो मताधिकारा रा अधिकार हो। साइमन कमीशने मनया भई रिजर्व सीटा देणी पर चुनावा बिच खड़ने कठे उम्मीदवारा जो तेस प्रांता रे गर्वनरा ले प्रमाण पत्र लैणा पौणा। सन 1930 होर 1931 ई. री राउंड टेबल कांफ्रेंसा बिच बी अंबेदकर भाग लैहाएं।

महाड़ा दलित जातियां री पैहली कांफ्रेंस हुआईं मार्च 1927 बिच होर दूजा सत्याग्रह हुआं 25 दिसंबर 1927 बिच। 24 साला रे आर बी मोरे 1924 बिच महाड़ दलिता जो संगठित करने रा काम शुरू करहाएं। दरअसल 1923 बिच तिथी री नगरपालिके एक प्रस्ताव पारित कितिरा था तेता जो बोले प्रस्ताव बी बोल्हाएं। एस प्रस्तावा रे अनुसार सारे सार्वजनिक कुएं, सडक, मंदिर बगैरा दलिता कठे खुले हुणे चहिए। पर ये प्रस्ताव लागू नीं हुई करदा था। एता जो लागू करने कठे तिथी बगावता हुई करहाईं थी। इधी आपणे अध्यक्षीय भाषणा बिच अंबेदकर बोल्हाएं भई अश्पृष्या जो सफेद कॉलर नौकरियां अपनाणी चहिए। 25 दिसंबरा जो मनु स्मृति रे दहन के स्यों निश्चित तौरा पर ब्राह्मणवादी सोचा पर हमला करहाएं। अंबेदकरे एतारी तुलना फ्रांसा री क्रान्ति बिच बास्तीय रे किले पर धावे के किती थी। आनंद तेलतुमडे एतारी आलोचना कितिरी होर बोलिरा भई ये एक प्रतीकात्मक कदम था जबकि बास्तीय किले पर धावा प्रतीकात्मक कदम नीं था। एता बिच जनता सडका पर आई थी होर जनते किले पर धावा बोली दितेया था। सन 1941-42 ई. मंझ अंबेदकरे शैडयुल्ड कास्ट फैडरेशना रे माध्यमा ले क्रिप्स मिशना रे सामहणे तीन प्रस्ताव रखे थे। यों प्रस्ताव थे अलग चुनाव क्षेत्र दितेया जाए, कार्यकारिणी बिच दलित प्रतिनिधित्व दितेया जाए होर अलग दलित गांव बसाये जाएं।

अंबदकरा री तरीजी रणनीति थी राज्यसत्ता के सहयोग। अंबेदकर वार कौंसिला रा समर्थन करहाएं। वायसराय री कौंसिला बिच स्यों सदस्य बणहाएं। सरकारा के सहयोगा रे दौरान तिन्हारा मुख्य योगदान रैहां इंडियन ट्रेड यूनियन संशोधन बिल 1946। एस संशोधना बिच स्यों प्रावधान करहाएं भई हर नियोक्ता यानि मालिका जो आपणे कारखाने बिच एक ट्रेड यूनियना जो मान्यता देणे री बाध्यता हुणी। तिन्हें अंग्रेज सरकारा ले इंग्लैंडा रे टैक्नीकल संस्थाना बिच दलिता कठे कुछ सीटा आरक्षित करवाई। आजादी बाद स्यों संविधान सभा रे अध्यक्ष बणे। हालांकि एस संविधाना बिच ज्यादातर प्रावधान 1936 रे गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्टा रे हे लिते गए। जेता करूआँ कई कठोर कानून आसारे संविधान बिच शामिल रैहे होर यों कानून अझी तका मौजूद हे। अंबेदकर प्रगतिशील हिंदू कोड बिल ल्याउणा चाहें थे होर स्यों तेता कठे लडे बी थे। एसते अलावा स्यों श्रम मंत्रालय चाहें थे पर स्यों कानून मंत्री बनाई दिते गए। जेता करूआं तिन्हें 1955 बिच मंत्री पदा ले इस्तीफा देई दितेया था। बादा बिच तिन्हारा संविधाना ले मोहभंग हुई गईरा था होर तिन्हें बोल्या था भई एस संविधाना जो जलाणे वाले सभी थे पैहले स्यों हे हुणे। 

अंबेदकरा री चौथी रणनीति थी धर्मांतरण। एता रे बारे बिच पैहला उल्लेख मिल्हां 1929 री जलगांव दलित वर्गा री कांफ्रेसा बिच। एता ले बाद स्यों 18 जून 1936 बिच हिंदू महासभा रे मुंजे से मिल्हाएं। मुंजे तिन्हा जो सिक्ख बणने रा सुझाव देहाएं। पर जेबे सिक्ख धर्मा ले तिन्हा जो कोई खास तवज्जो नीं मिल्दी ता तिन्हारा झुकाव बौद्ध धर्मा बखौ हुई जाहां। स्यों बौद्ध धर्मा रा अध्ययन करहाएं। होर जीवना रे आखरी वक्ता बिच जेबे अंबेदकर बौद्ध बणहाएं तो तिन्हा सौगी करीब 6 लाख दलित बौद्ध बणी जाहें। पर नवबौद्धा रे रूपा बिच बौद्ध धर्मा बिच बी एक नौंवा वर्ग बणी जाहां। एता के बी जाति अंत नीं हुई पांदा। अंबेदकरा री कताब ही बुद्ध होर मार्क्स। कताबा बिच स्यों दसहाएं भई तिन्हें बौद्ध धर्मा रे त्रिपिटका रा अध्ययन कितिरा। पर स्यों ये नीं दसदे भई तिन्हें मार्क्सा रे बारे बिच क्या अध्ययन कितिरा। आनंद तेलतुमडे बोल्हाएं भई अंबेदकरे मार्क्सवादा री एक भी क्लासकीय कताबा रा अध्ययन नीं कितिरा था।

Sunday, June 9, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-6






अपणिया भासा च समाज दे बारे चसमाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाला जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखा दे हन। इसा माला दा पैह्ला मणका असां कुछ चिर पैह्लें पेश कीता था। फिरी पहाड़ी भाषा पर चर्चा चली पई। हुण एह लेखमाला फिरी सुरू कीती है अज पढ़ा इसा दा छेउआं मणका।



ड्यूईवादी व्यवहारवादा रे मूल होर एतारी विशिष्टता


व्यवहारवादी दर्शना (प्रैगमैटिक फिलॉसफी) रा जन्म अमेरिका बिच हुआ। अमेरिका री स्थापना एक पूँजीवादी देशा रे रूपा बिच हुई। अमेरिका रा कोई सामंती अतीत नीं हा। अमेरिका बिच सन 1776 ई. रे स्वतंत्रता युद्धा मंझ लड़ने वाले ज्यादातर लोक इंगलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरिश प्रवासी थे। फ्रांसिसी क्रान्ति रे सिद्धांत तिन्हा जो प्रेरित करी करहाएं थे। थामस पेना रे विचार डिक्लेरेशन ऑफ राइटस ऑफ मैन, समानता, स्वतंत्रता होर भ्रातृत्वा रे उसूला ले प्रेरित थे। यों विचार सामंती जडत्वा रे खिलाफ भावना व्यक्त करी करहाएं थे। लगानजीवी या परजीवी बणने री जगहा उद्यमिता यानि एंटरप्रिनियरशीपा री गल्ल करी करहाएं थे। पूँजीवादा रे पैदा हुणे बिच सभी थे बडी भूमिका थी प्रोटेस्टैंट धर्मा रे पैदा हुणे री। उद्यमिता री भावना यानि स्पिरिट ऑफ एंटरप्रिनियरशीप पैदा हुआईं। मैक्स वैबरा रा भाववादी सिद्धांत सामहणे आवहां। उभरदे हुए पूँजीपती वर्गे हे अमेरिका बसाया। पैहली गल्ल, तिन्हा बाले कोई सामंती अतीत नीं था। दूजे अमेरिका शुरू ले हे पूँजीवादी होर साम्राज्यवादी देश था। तरीजे इथी रा पूँजीवाद इन्हा भाववादी विचारा रे विरोधाभासा बिच रेड इंडियना रे कत्लेआम होर काले लोका जो गुलाम बनाणे री ताकता पर खड़ही रा था। इथी बाह्य होर आंतरिक विस्तारा री अनंत संभावना थी। जेता के इथिरा विशिष्ट रूप बणया। इथी पूँजीवादा जो संतृप्त बिंदू तका पौंहचणे कठे लंबा वक्त लगया। यानि करीब 100 साल लगे होर 1860 तका एस लंबे वक्ता बिच एक नौंवें सामाजिक दर्शना रा जन्म हुआ। इथी लम्पट सर्वहारा वर्ग भी भग्गी के आई करहां था। लम्पट सर्वहारा बिच केसी बी किस्मा री सांगठनिक होर राजनैतिक चेतना बौहत कम मात्रा बिच हुआईं। एतारी वजहा के तेस बिच वर्ग चेतना नीं हुंदी। तेसरा एकी तरहा के विमानवीयकरण हुई गईरा हुआं होर से बौहत बिखरी रा हुआं। एहडा लम्पट सर्वहारा हर देशा बिच पाया जाहां। लम्पट टटपूँजिया वर्ग जे मिडल क्लास व्यापारियां रा वर्ग हुआं अमेरिका बिच लैंड ऑफ ओपोर्चुनिटी री गल्ला सुणुआं तिथी पौहंचा। चार्ली चैपलिन री फिल्म गोल्ड रश एस घटनाक्रमा जो दसहाईं।

अमेरिका रे सामाजिक दर्शना बिच दूजा मीला रा पात्थर हा अमेरिकन सिविल वार यानि द्वितीय अमेरिकी क्रान्ति। एस दौरा रा बडा दार्शनिक हुआ इमरसन। तिन्हारा ट्रांसिडेंटलिसमा रा सिद्धांत डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस होर डिक्लेरेशन ऑफ मैना ले हे निकलहां। एता रे अनुसार भूतकाल वर्तमाना रा निर्माण नीं करदा। अतीता री वर्तमाना रे उत्पादना मंझ कोई भूमिका नीं हुंदी। पर वर्तमान किहां पैदा हुआं? समकालीन मनुष्या रे सामुहिक होर व्यक्तिगत प्रयासा रे समुच्चय होर अतीता रे प्रभावा रे मेलजोला के वर्तमान बणहां। इमरसन काण्टा ले प्रेरणा लैहां था होर आपणे तरीके के सामाजिक मनोविज्ञाना जो अभिव्यक्ति देहां था। बेंजामिन फ्रेंकलिना री कताब पुअर रिचर्डस अलमानैक अमेरिकी समाजा जो प्रभावित करहाईं। व्यक्तिवाद सामहणे आवहां। व्यक्ति हे सभ कुछ हा। सब कुछ तेसरे आपणे प्रयासा पर हे निर्भर करहां। सन 1860 ई. आउंदे-2 अमेरिका मंझ मुक्त व्यापारा पर आधारित पूँजीवाद खत्म हुंदा लगी जाहां। अवसर कम हुई करहाएं थे जबकि बडी कंपनियां होर बडे पूँजीपती पैदा हुई करहाएं थे। अमेरिका इजारेदारी होर पूँजी रे केन्द्रीयकरण होर सघनीकरणा री मंजिला बिच प्रवेश करी करहां था। छोटे पूँजीपती तबाह हुई के सर्वहारा री कतारा मंझ शामिल हुई करहाएं थे। तिन्हारे अमीर हुणे रे सुपने टुटणे शुरू हुई गईरे थे। एता री राजनैतिक अभिव्यक्ति पॉपोलिस्ट मुवमेंट (1880) होर पॉपुलिस्ट पार्टी (1880-1890) बिच देखणे जो मिली करहाईं थी। एस आंदोलना रे दिशा निर्देशक दर्शन देणे वाले थे चार्ल्स पियरे होर विलियम जोन्स। यों पैहले व्यवहारवादी दार्शनिक थे। इन्हारा दर्शन मुक्त व्यापारा यानि अतीता री यादा (नोस्टेलजिया) ले निकली करहां था। पॉपुलिस्ट पार्टी जेबे भंग हुई ता तेता बिच शामिल मजदूरा रा एक हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी बिच चली गया जबकि दूजा हिस्सा अमेरिका री कम्यूनिस्ट पार्टी बिच चली गया। जॉन ड्युई एस विचारधारा रे हे दार्शनिक थे। इन्हारे विचारा जो ड्युईवादी व्यवहारवाद (प्रैगमैटिसम) या ऑपरेशनलिसम, इन्‍स्‍ट्रुमेंटलिस्म या प्रोग्रेसिव एक्सपेरीमेंटलिस्म बी बोल्हाएं।

जॉन ड्युई रा व्यवहारवादा रा सिद्धांत पैहली गल्ल ये बोल्हां भई प्राकृतिक होर सामाजिक परिघटना रा कोई आम सिद्धांत नीं हुंदा। पर विज्ञान ता सिद्धांता पर हे चलहां। आम सिद्धांता री गल्ल नीं करी के जे सुझी करहां तेतारा सामान्यीकरण नी करने ले आसे तेतारी असलियता तक नीं पौहंची सकदे। केसी बी समस्या रे समाधाना कठे विज्ञाना रा काम हुआं सभी ते पैहले देखणा यानि प्रेक्षण करना, फेरी देखिरी चीजा पर एक मोटा मोटा विचार पैदा करना, फेरी तत्काल एक्शना कठे योजना बनाणा होर फेरी एस योजना पर काम शुरू करी देणा। एता के अगर समाधान हुई जाओ ता ठीक हा नीं ता केसी अंतिम नतीजे पर पौंहचुआं एता पर सोचणा बंद नीं करी देणा चहिए। दूजी गल्ल व्यवहारवाद बोल्हां भई कार्य-कारण संबंध स्थापित नीं कितेया जाई सकदा। यानि अतीता री कोई भूमिका नीं ही वर्तमाना बिच। ये तिन्हें इमरसना रे ट्रांसिडेंटलिसमा ले लितिरा था। ये अगस्ट कॉमटे, काण्ट, हयुमा रे प्रत्यक्षवाद यानि पाजिटिविसम होर अनुभाववाद यानि एक्सपेरियंशलिज्‍मा ले प्रभावित था। तरीजी गल्ल जॉन ड्युई समाजा री अवधारणा रे बारे बिच करहाएं। ड्युई रे मुताबिक समाज असंगत समुहा रा समुच्चय हा जेता बिच ट्रेड यूनियन, कर्मचारी यूनियना, बास्केटबाल क्लब बगैरा रे समुह आवहाएं। जबकि मार्क्सवादा रे अनुसार समाज परस्पर विरोधी वर्गा के बणीरा हुआं। से उत्पादना रे संबंधा रे कुल योगा रा समुच्चय हुआं। एतारी गति रा तर्क हुआं एतारा अंतर्विरोध। अंतर्विरोध होर परस्पर टकरावा के हे विकास हुआं। जबकि ड्युई रा व्यवहारवाद बोल्हां भई हकीकता बिच कोई अंतर्विरोध नीं हुंदा होर ये प्रतीतीगत अंतर्विरोध हुआं जेता रा समाधान सभी थे तार्किक अभिकर्ता यानि ग्रेट मिडिएटर (महान मध्यस्थ) यानि सरकार करहाईं। व्यवहारवादा रे अनुसार समाजा मंझ हर परिवर्तन सरकारा री कार्यवाई ले हुआं। स्यों रूसो होर लॉके री सोशल कंट्रैक्ट थ्युरी रे आधारा पर बोल्हाएं भई हिंसा बेकार ही होर सोशल एंडोसमोस री गल्ल करहाएं। व्यवहारवादा रे अनुसार अगर जनता थाल्हे ले परिवर्तन करहाईं ता हिंसा हुआंई। जनता जो लड़ना नीं चहिए बल्कि सरकारा जो प्रभावित करना चहिए। बौधिक वर्गा जो परिवर्तन ल्याउणे कठे सरकारा जो सुझाव देणे चहिए। व्यवहारवाद ये बी बोल्हां भई एक मानवतावादी समानतामूलक धर्म जरूरी हा जेता के सामाजिक आचार संहिता बणीरी रैही सको। सन 1897 ईं बिच जॉन ड्युई रा लेख छपया था कॉमन फेथ। जेता बिच स्यों धर्मा री जरूरता री गल्ल करहाएं भले हे तेस धर्मा रा कोई ईश्वर हो चाहे नीं हो।


Sunday, June 2, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-5




अयंकाली, फुले, पेरियारा रे आंदोलना रा मूल्यांकन

जाति विरोधी आंदोलना कठे सुधारक होर जुझारू योद्धा अयंकाली, ज्योति बा फुले, पेरियार, अंबेदकर समेत बौहत सारेयां रा योगदान रैहिरा। इन्हा बिच एकी लिहाजा ले कुछ मामलेयां मंझ सभी थे महत्वपुर्ण हे अयंकाली। अयंकाली जाति विरोधी आंदोलना री लड़ाई जो आर्थिक, सामाजिक होर राजनैतिक धरातला पर लेई गए। स्यों सुधारवादी नीं थे बल्कि प्राथमिक रूपा ले जुझारू, रैडिकल होर प्रगतिशील जाति विरोधी योद्धा थे। स्यों औपनिवेशिक राज्या री कानूनी सीमा री परवाह बी नीं करदे थे। एतारा उदाहरण हा चेरियार दंगा। सन 1900 ई. बिच केरला मंझ पुलयार जाति जो सड़का पर चलणे रा अधिकार नीं था। अयंकाली गंडासा लेई के कल्हे सड़का पर निकले। तिन्हा जो रोकणे री केसी जो हिम्मत नीं हुई। एता ले बाद चेरियार दंगा हुआ होर 2-3 दिना तक युद्धा साहीं माहौल बणीरा रैहा। जेता बिच दलिता भारी पई गए। मद्रास रेजिसेंडिए घटना रा संज्ञान लितया होर दलिता रा सड़का पर चलणे रा अधिकार बहाल हुआ। अयंकाली रे सड़का रे आंदोलना के सरकारा जो कानून बनाणे कठे मजबूर हुणा पया। सन 1907 ई. बिच तिन्हें आंदोलना के दलित बच्चेयां जो स्कूला मंझ दाखिला दिलवाणे रा हक हासिल कितेया। भारता री पैहली कृषक मजदूर ट्रेड यूनियन बी इन्हें बनाई थी। हालांकि ट्रेड यूनियन एक्ट सन 1926 ई. बिच आया था। अयंकाली रैडिकल तरीके के आंदोलन करहाएं थे होर स्यों जनता री ताकता पर भरोसा करहाएं थे। आनंद तेलतुमडे बोल्हाएं भई चेरियार दंगा भारता रा पैहला दलित सशस्त्र विद्रोह था। 


ज्योति बा फुले री सभी ले प्रसिद्ध रचना ही गुलामगिरी। स्यों माली जाति बिच पैदा हुआएं। क्रिश्चन मिशनरी स्कूला बिच दाखिल हुआएं। इथी स्यों पाश्चात्य आधुनिकता, तर्कपरकता होर वैज्ञानिक दृष्टिकोण कठे ब्रिटिशरा ले प्रभावित हुआएं। गुलामगिरी बिच स्यों व्यंग्यात्मक ढंगा के ब्राह्मणवादा रा खंडन करहाएं होर ब्रिटिशरा जो मुक्तिदाता रे रूपा बिच देखाहें। पर सुले-सुले तिन्हारा अंग्रेजा रे प्रति मोह भंग हुंदा जाहां। 1879 ई. बिच हंटर कमीशना सामहणे आपणी गवाही बिच स्यों सुझाव होर प्रस्ताव सौंपाहें। स्यों बोल्हाएं भई जेबे ब्रिटिशर तर्कपरकता पर यकीन करहाएं ता हर जगह ब्राह्मणा जो हे वरीयता की दिती जाहीं। ये ठीक कितेया जाणा चहिए। 1881 बिच ज्योति बा फुले किसान का कोडा कताबा बिच लिखाहें भई ब्राह्मणा होर अंग्रेजा री चमड़ी उखाड़ी जाए ता एक हे खून निकलणा। तिन्हें टैक्स प्रशासना री आलोचना किती होर दसया भई किसान किहां टैक्सा के दभदा जाहां। स्यों बोल्हाएं भई अंग्रेजे ब्राह्मण आपणे मित्र बनाई लितिरे। लोहखंडे जो ज्योति बा फूले ये कताब छापणे कठे दिती थी पर तिन्हे आखरी 3 अध्याय छापे हे नीं थे क्योंकि तिन्हारा मनणा था भई ये सरकारा री ज्यादा हे आलोचना करी दितिरी। जेता कठे फुले नाराज हुए थे पर बाद बिच इन्हा अध्याया समेत छापी दिती थी। ज्योति बा फुले मजदूरा रा एक अलग मंच बी बनाया था जेता रा नांव था मिल हैंड एसोसिएशन। ज्योति बा फुले एहडे जाति विरोधी सुधारक थे जिन्हारा रवैया बधलदे वक्ता के ब्रिटिशर समर्थका ले ब्रिटिशर विरोधी हुंदा गया। शिक्षा रे क्षेत्रा बिच तिन्हें सरकारा ले हटी कने सावित्री बा फुले सौगी काम कितेया होर जनता पर भरोसा कितेया। सत्यशोधक समाजा री स्थापना किती धार्मिक कर्मकांडा रे मुकाबले ब्याह री नौंवी संस्था बनाणे कठे योगदान कितेया।

ई.वी.रामास्वामी पेरियार निरिश्वरवादी होर जझारू भौतिकवादी थे। तिन्हारा मनणा था भई तार्किकता रा प्रचार हे जाति अंता बखौ लेई जाई सकहां। स्यों बोल्हाएं थे भई धर्मा रा सरकार, राज्यसत्ता होर सामाजिक जीवन के कोई लेणा देणा नीं हुणा चहिए होर ये निजी मसला हुणा चहिए। केसी बी तरहा री पारलौकिक सत्ता बिच यकीन केसी ना केसी किस्मा रे सामाजिक संस्तरीकरण होर सामाजिक उत्पीडना जो जन्म देई सकहां। पेरियार ब्रिटिशरा रा विरोध नीं करदे थे पर स्यों मन्हाएं थे भई ब्रिटिश सत्ता धर्मनिरपेक्ष नीं ही। इधी कठे से सांप्रदाया रा जातिगत विभेदीकरण करहाईं। पेरियार सोवियत संघा री बौहत प्रशंसा करहाएं थे होर आपु बी जाई आइरे थे रूसा। स्यों बोल्हाएं थे तिथिरी राज्यसत्ता धर्मनिरपेक्ष ही। धर्मनिरपेक्षा रे दो मतलब लिते जाहें एक ता हा सर्वधर्म समान हे होर दूजा हा धर्मा रा राज्यसत्ता या सामाजिक जीवना के लेणा देणा नीं हुणा।

आजा रे जमाने बिच धर्म केता पर टिकिरा? धर्म पैदा हुआ था मनुष्या रे अज्ञाना ले। अज्ञाना रा महाद्वीप घटदा गया होर ज्ञाना रा महाद्वीप बधदा गया। पर तेबे बी धर्म ज्युंदा हा। कि? एतारा कारण हा एक एहड़ी व्यवस्था नीं हुणा जेता बिच मनुष्य दुनिया भरा रा सब कुछ पैदा करी लैणे रे बावजूद, टैक्नोलोजी रा अभूतपूर्व विकास करी लेणे रे बाद, आज इन्सानियत रोज सिर्फ दो-अढ़ाई घंटे रा हे काम करे ता व्यक्तिगत जरूरता री हर चीज पैदा किती जाई सकहाईं होर बाकि 22 घंटे मंझ आठ घंटे सोणे जो होर बाकि 12 घंटे सांस्कृतिक वैज्ञानिक उत्पादना बिच लगाई सकहाएं जेता जो मार्क्से बोल्या था भई ये से वक्त हुणा जेबे सही मायने बिच आसा जरूरता रे साम्राज्य ले स्वतंत्रता रे साम्राज्य बिच चली जाणा। जेबे रोटी, कपडा होर मकान ता कोई मुद्दा हे नीं रैही जाणा। आज भी ये मुद्दा नहीं हुणा चहिए। लोक भूखा के इधी कठे नीं मरदे भई अनाजा री कमी ही। बल्कि ठीक उल्टा लोक इधी कठे भूखा ले मरहाएं क्योंकि अनाज ज्यादा हा। ये जे अतार्किक, अवैज्ञानिक व्यवस्था ही जे हर चीजा जो अधिकता बिच पैदा करहाईं पर तेबे बी जेस जगहा पर आक्सीजना री कमी के 63 बच्चे मरी जाहें होर तेबे बी जेस जगहा पर 9000 बच्चे हर रोज भूख होर कुपोषण के मरी जाहें। एक एहडे देशा बिच 21वीं सदी मंझ जे उभरदी हुई अर्थव्यवस्था हुणे रा दावा करहां होर दुनिया री सभी थे उन्नत श्रम शक्ति 10 साला बिच पैदा करने रा दावा करहां जेता बिच नौजवाना री आबादी प्रतिशता बिच दुनिया भरा मंझा सभी थे ज्यादा ही यानि एक युवा देशा बिच एहडा हुई करहां ता सोचणा ता पौणा हे हा भई एसा अर्थव्यवस्था रे सौगी कोई भयंकर गड़बड़ी ही। एहडी व्यवस्था मंझ अनिश्चितता होर असुरक्षा पैदा हुआईं। आसौ बोल्या जाहां भई हर कोई आपणा आपु देखे। ये शासनकारी दर्शन हा। सामाजिक डार्विनवादा री विचारधारा काम करहाईं भई जेस काबिल हुणा तेस करी लैणा। आसारी शिक्षा व्यवस्था होर मीडिया बी एहडा हे दसहां। जबकि 86 प्रतिशत दलित छात्र 12वीं ले पैहले स्कूल छाडी देहाएं। एस व्यवस्था री अनिश्चितता होर असुरक्षा धर्मा बिच, ढकोसले होर बाबेयां बिच भरोसा पैदा करवाहीं। अच्छे खासे पढे लिखे वैज्ञानिक लोक पीएसएलवी बनाई लैहें पर लाँच करने ले पैहले बाला जी लेई जाहें टिक्का लगाणे कठे। एहडा हा आसारा देश। आसारा हे देश नीं बल्कि दुनिया रे होर मुल्का बिच बी ढकोसला बधी करहां। हॉलीवुड होर बॉलीवुडा मंझ हॉरर फिल्मा बणने री रफ्तार बधी गइरी। पिछले आर्थिक संकटा ले बाद शैतानी सत्ता होर पारलौकिक सत्ता रा टकराव दसया जाई करहां। अमेरिका होर भारता रा मुकाबला हो ता अमेरिका री अच्छी खासी पढी लिखी आबादी भूतप्रेता बिच ज्यादा विश्वास करहाईं। अमेरिका अंधविश्वास, ढकोसलेबाजी, कट्टरता होर घरेलू हिंसा बिच भारता के मुकाबला करी सकहां। ये तेस देशा रे हाल हे जेता जो आसारे देशा बिच स्वर्गा रे मॉडला रा रूप मनया जाहां। पूँजीवाद जेस तरीके के 80 प्रतिशत लोका री जिन्दगियां जो असुरक्षा होर अनिश्चितता रे गर्ता बिच धकेली करहां। तेता के देश होर दुनिया मंझ अंधविश्वास, ढकोसले, तरहा-2 रे पंथ, बाबेयाँ रा केन्द्र बणया करहां। धर्म अपनाणे रा कारण आदमी री जिंदगी रे दुख हे। इधी कठे से धार्मिक बणहां। धार्मिक आदमी जो गाली देणे री कोई जरूरत नीं ही। अगर एहडा करो तो साफ तौरा पर दूजी तरफा ले बी प्रतिक्रिया आउणी। लेनिने बोल्या था भई धर्मा रे खिलाफ प्रचार हमेशा धर्मा जो मजबूत करहां। इधी कठे धर्मा री जड़ खोदो। ये समाजवादा बिच हे हुई सकहां। अगर धर्म खत्म करना हो ता समाजवादा कठे लड़ो।

Saturday, May 18, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-4



अपणिया भासा च समाज दे बारे च, समाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाला जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखा दे हन। इसा माला दा पैह्ला मणका असां कुछ चिर पैह्लें पेश कीता था। फिरी पहाड़ी भाषा पर चर्चा चली पई। हुण एह लेमाला फिरी सुरू कीती है जिसा दा त्रीया मणका तुसां पढ़ेया। अज पढ़ा इसा दा चौथा मणका। 


आजादी ले बाद भारता मंझ जाति-व्यवस्था



देशा री आजादी ले बाद आसा सामहणे आवहां देशा रा संविधान। आसारा संविधान देशा जो जनवादी, धर्मनिरपेक्ष होर समाजवादी घोषित करहां। पर संविधाना जो बनाणे वाली संविधान सभा समूची जनता ले सार्विक मताधिकारा रे अधिकारा के नीं चुनी गई थी। सिर्फ 11.6 प्रतिशत लोके ज्यों सम्पतीधारी, राजे-रजवाडे होर पूंजीपति वर्गा रे थे तिन्हां जो हे वोट पाणे रा अधिकार था। तिन्हारी चुनी री संविधान सभे आसारा संविधान बणाया। पैहली गल्ल जनवादी घोषित हुणे वाला आसारा संविधान जनवादी तरीके के बणाया ही नीं गईरा था। नेहरूए पैहले चुनावा बाद ये ठीक करने कठे बोल्या था पर कधी बी ठीक नीं हुई पाया। दूजी गल्ल संविधाना रे अनुच्छेद, धारा, उपधारा बिच नौवीं गल्ला बौहत कम ही। एता बिच ज्यादातर गल्ला गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1935 ले ज्यों की त्यों चकी लितिरी। संविधाना बिच बिना कोई संशोधन कितिरे आपातकाल लगाया गया था। आपातकाला रा प्रावधान संविधाना बिच पैहले ले हे था। जितनी दमनकारी धारा अंग्रेजा जो हिन्दुस्तानियां पर राज करने कठे जरूरी थी स्यों सभ दमनकारी धारा संविधान बिच शामिल रखी गई। आजादी रे बाद हालांकि कानूनी रूपा ले अश्पृष्यता खत्म करी दिती गई। पर आसारा संविधान संपूर्णता बिच क्या देहां होर ये केसरी सेवा करहां ये आसा जो जरूर देखणा चहिए। आसे देखेया भई उपनिवेश काला बिच पूंजीवादा रे विकास, औद्योगिकरण होर सीमित शहरीकरणा के अश्पृश्यता होर वंशानुगत श्रम विभाजन आंशिक तौरा पर टुटणा शुरू हुआ। आजाद भारता बिच ये प्रक्रिया होर तेजी के बधी।

भारतीय पूँजीपति वर्गा रे विकासा रे रस्ते पर टाटा-बिडला प्लान 1944 बिच बणना शुरू हुआ जेता बिच विकास अर्थशास्त्री, सांख्यिकीकार, पूँजीपतियां रे प्रतिनिधी टाटा, बिडला, थापर, गोयनका बगैरा शामिल थे। ये प्लान 1945 बिच बणी के तैयार हुई गया। क्रिप्स मिशना रे आउणे बाद ये साफ हुई गईरा था भई एभे अंग्रेजा रा केभे बी भारता ले जाणा पक्का हा। हालांकि स्यों जाणे री तिथी ले पैहले ही चली गए थे। टाटा-बिडला रे प्लाना रे हिसाबे अब देश चलाया जाणा था। एस प्लाना रे मुताबिक देशा जो विदेशी कर्जे पर ज्यादा निर्भर नीं रैहणा चहिए बल्कि राष्ट्रीय बचत इकट्ठी की जाणी चहिए। यानि साम्राज्यवादी देशा रे कर्जे पर निर्भर नीं रैहणे बल्कि आपणे देशा बिच राष्ट्रीय बचत बैंकिंग होर पोस्टल सेवा रे जरिये इकट्ठी की जाणी चहिए। दूजी गल्ल एस प्लाना बिच ये थी भई आयात कम करने री नितियां लागू करनी। देशा बिच जे भी जरूरता रा सामान हा चाहे से प्रोडक्शन गुड या उपभोक्ता सामान इन्हा रा आयात खत्म करदे जाणा ताकि देश आत्मनिर्भर बणी जाओ। इधी कठे सरकारी क्षेत्रा रे पूँजीवादा री स्थापना किती जाए। आधारभूत उद्योग राष्ट्रीय संपति रे रूपा बिच रखे गए। आधारभूत ढांचा हाईवे, रेलवे, बांध होर सिंचाई बगैरा पैहले सरकारा तैयार करने होर जेबे आधारभूत ढांचा तैयार हुई जांघा तेबे तिन्हारा निजीकरण कितया जाणा।

भूमि सुधार कठे लैंड सिलिंग एक्ट आवहां 1956-57 बिच। पर इथी भूमी सुधार किसान केन्द्रीत नीं बल्कि सामंत केन्द्रीत भूमी सुधार हुआ। ये सुधार फ्रांसा री क्रान्ति रे मॉडला पर नीं हुआ बल्कि जर्मनी रे प्रशिया बिच बिस्मार्क रे वक्ता साहीं युंकर टाइपा रा हुआ। जेता बिच पुराणे भूस्वामियां जो आज्ञा दिती जाहीं भई स्यों आपणे जो बदली लौ। एसा पृष्ठभूमि पर सत्यजीत रे री खूबसूरत फिल्म बणीरी जलसाघर। इन्हां सुधारा के स्वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय सामंत पूँजीवादी कुलक फार्मर बणी जाहें। आजादी रे बाद खेतीहर मजदूरा री अधिकांश आबादी दलित थी। आज बी खेतीहर मजदूरा मंझ 48 प्रतिशत दलित जातियां रे मजदूर हे। भूमिहीनता री जड़ इन्हां भूमि सुधारा बिच हे ही। स्वर्ण सामंती भूस्वामी प्रमुख कुलक पूँजीवादी बणी गए। उत्पादकता बधणे ले धनी किसाना रा वर्ग पैदा हुआ। पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थाना बिच हरित क्रान्ति हुआईं। धनी काश्तकार किसाना रा वर्ग हरित क्रान्ति के 80 रे दशका तक अग्गे बधया होर तिन्हा रे भारतीय किसान यूनियना सरीखे राजनैतिक संगठन पैदा हुए। मध्यम किसान जातियां रेड्डी, कम्मा, जाट, गुज्जर, मराठे बगैरा जो लाभ पौंहचेया। दलिता जो नाममात्रा री ही जमीन दिती गई। दक्षिण होर पूर्वी भारता बिच थोडे बौहत पट्टे दिते गए। दलिता रे छोटे जेह हिस्से बाली छोटी जमीना ही। एता के तिन्हा रा गुजारा नीं हुणे रे कारण स्यों होरियां री जमीना पर मजदूरी करहाएं या शैहरा जाईके कोई नौकरी करहाएं। दलिता रा बड़ा हिस्सा खेतीहर मजदूर हा।


पूँजीवादी विकास होर प्रतिस्पर्धा खेती रे क्षेत्रा बिच हुणे ले किसाना बिच बी विभेदीकरण पैदा हुआं। किसाना रा वर्ग होर पूँजीपति कुलका रा वर्ग पैदा हुआं। पैदावार बाजारा कठे हुआईं। तिन्हा जो प्रतिस्पर्धा रा सामना करना पौहां। आपणी लागत कमा ले कम करनी पौहाईं। एस प्रतिस्पर्धा बिच 90 प्रतिशत से हे किसान जीतहां जेस बाले ज्यादा पूँजी हुआईं। जे बेहतर टैक्नोलोजी होर बीजा रा इस्तेमाल करहां। तेसरी पौहुंच सरकारी कर्जेयां होर संस्थाबद्ध कर्जेयां तक हुआईं। स्यों गांवा रे आढतियां होर सूदखोरा ले कर्जे नीं लैंदे। बैंक होर वितिय संस्थाना ले तिन्हा जो हे लोन मिलहां ज्यों साखा वाले लोक हुआएं। प्रतिस्पर्धा के छोटी होर निम्न मंझौली किसाना री तबाह हुणे री प्रक्रिया 60-70 रे दशका ले शुरू हुआईं होर अझी तका चलीरी। छोटी किसानी लगातार तबाह हुई करहाईं। नौवां डैटा आइरा भई गांवां रे भीतर गैरकृषि गतिविधियां बिच लगीरी आबादी री संख्या 50 प्रतिशता ले ज्यादा हुई गईरी। कृषि री बडी आबादी सेवा होर उद्योग क्षेत्रा बिच लगी गईरी। छोटी, निम्न मझौली होर मझौली आबादी री तबाही हुणे ले तिन्हा रा सर्वहाराकरण हुई गईरा। कृषि करने वाले कई लोक अब शैहरा रैही के काम करी करहाएं होर तिन्हा बाले जे जमीन गांवा ही तेता जो स्यों बडे किसाना जो या आपणे हे केसी भाई बाले कमाणे जो छाडी देहाएं। कुछ एहडे बी अर्धसर्वहारा हे ज्यों शैहरा कमाहें होर गांव री खेती जो बचाणे कठे पैसा भेजहाएं पर तिन्हा जो खेती बदले बिच कुछ देंदी नीं ही बल्कि उल्टा तिन्हा जो खाई करहाईं। इन्हा बिच ओबीसी जाति रे लोक ज्यादा हे। नवउदारवादी नितियां रे दौरा ले बाद 1990 ले 2011 तका विकिसानीकरण रे आंकडे बौहत कुछ बोल्हाएं। 2001 री जनगणना बिच भूमि रे मालिक किसाना री संख्या 31 प्रतिशत थी जे 2011 री जनगणना बिच 27 प्रतिशत रैही गई। यानि 10 साला बिच 4 प्रतिशत किसाना री जनसंख्या तबाह हुई गई।


दलित जातियां रे अलावा आज केसी बी जाति रा साफ दिखदा वर्ग चरित्र नीं हा। आनंद तेलतुमडे लिखाएं भई दलिता रा 89-90 प्रतिशत हिस्सा मजदूर हा पर 10-11 प्रतिशत हिस्सा साफ तौरा पर मजदूर नीं हा। ये हिस्सा मध्यम वर्गा रा संस्तर या उच्च वर्ग या कुलीन हुई चुकीरा। प्रमुख किसान जाति ओबीसी रा छोटा हिस्सा खांदा-पींदा किसान हा। जबकि ज्यादा होर बड़ा हिस्सा नवउदारवादी नितियां रे करूआं तबाह होर बर्बाद हुई के अर्धमजदूर होर मजदूरा री जमाता बिच शामिल हुई गईरा। पूँजीवादी विकासे जातिगत समुह होर वर्गगत समुहा रा आच्छादन काफी हदा तक शिफ्ट करी दितिरा यानी बदली दितिरा। इधी कठे जाति री विचारधारा रा प्रयोग करीके लोका जो बांडणे कठे तिन्हा रे साम्हणे एक छद्म दुश्मण पैदा कितया जाई करहां। जिहां मराठा होर जाट जातियां साम्हणे पैदा कितेया जाई करहां। स्यों जे कुछ झेल्ली करहाएं तिन्हारे ज्यों जिम्मेवार हे तिन्हा जो कटघरे बिच खडा न कितया जाओ इधी कठे नकली शत्रु पैदा कितेया जाहां भई दलित शत्रु हा। यों जाति अत्याचार कानूना के पीडित करहांए होर आरक्षणा के नौकरी लेई जाहें। एस नकली शत्रु रे पैदा हुणे ले मराठा मोर्चा रा निशाणा दलित आबादी बणी जाहीं। छद्म शत्रु के लडने कठे जातिगत संस्कार हिलोरा मारदे लगहाएं। क्योंकि मराठा आबादी बिच सही लाईना जो लेयी के तिन्हा जो गोलबंदी करने वाली कोई ताकत मौजूद नीं ही। वर्ग लाईना पर चली के मराठा आबादी जो टारगेट करना चहिए पर एतारे बजाये स्यों आपणी अस्मिता री लडाई बिच पई जाहें। जेता के सारेयां री अस्मिता बडी हुंदी जाहीं। छद्म दुश्मण पैदा करने कठे भारता रा पूँजीपती वर्ग कई विचारधारा रा इस्तेमाल करहां। जेता बिच एक साम्प्रदायिकता री विचारधारा बी ही। ब्राह्मणवादी, पूँजीवादी, पितृसतात्मक होर साम्प्रदायिक शासक वर्गा जो हराणे रा एक हे तरीका हा वर्ग लाईना पर जातिगत गोलबंदी बिच सेंध लगाई के जाति अंता री परियोजना पर काम कितेया जाए। वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलन हे विकल्प हा।


भारता रे 7 करोड बाल मजदूरा मंझ 40 प्रतिशत दलित परिवारा ले हे। उत्पीडन, बेरोजगारी दर, पर कैपिटा कंसंपशन यानि प्रति व्यक्ति उपभोगा री कमी बिच दलित आबादी री संख्या होरी जातियां ले दुगुणी ही। हर जाति बिच वर्ग विभाजन जटिल हुईरा होर जातियां रा चरित्र बधलिरा। हर जाति मंझ कुलीन, उच्च मध्यम, मध्यम, निम्न होर मेहनतकोश लोक हे। निम्न वर्गा बिच मेहनतकश ज्यादा हे, मध्यमा बिच किसाना रा प्रतिशत ज्यादा हा होर उच्च वर्गा बिच सबसे ज्यादा प्रतिशत पूँजीपती, नौकरशाह, उच्च मध्यम वर्ग या नेता हे। सर्वहारा आबादी औद्योगिक, खेतीहर होर सेवा प्रदाता ही। कुल शहरी होर ग्रामीण मजदूर आबादी मंझ दलित 25-27 प्रतिशत, ओबीसी इन्हा ले थोडे ज्यादा 30-32 प्रतिशत होर जनजाति, मुस्लिम होर अन्य करीब 22 प्रतिशत हे। दलिता बिच 89-90 प्रतिशत शहरी या ग्रामीण मजदूर हे। ओबीसी बिच 70 प्रतिशत मजदूर हे जबकि जनजाति, मुस्लिम होर अन्या री कुल आबादी बिच दलिता ले बी ज्यादा मजदूर हे। पिछले 30 साला बिच जातिगत उत्पीडन बौहत ज्यादा बधी गईरा। इहां ता हर मजदूर शोषित हा पर दलित मजदूर अति शोषित हा। हर दलित पीडित हा पर मजदूर दलित उत्पीडना रे बर्बरतम रूपा रा शिकार हा। सामाजिक उत्पीडन आर्थिक उत्पीडना के गुंथित हुआं। गलोरिया रहेजा रा लेख हा एस बारे बिच सेंट्रलिटी ऑफ डोमिनेंट कास्ट देशा री आजादी बाद जाति री विशेषता मंझ वंशानुगत काम या ता लुप्त हुई चुकीरा या लुप्त हुणे रे कगार पर हा यानि मृतप्राय हा। अश्पृश्यता बी अब आम सच्चाई नीं ही। हालांकि जाति व्यवस्था री तरीजी विशेषता सजातिय ब्याह अझी तका नीं तोडया गइरा होर ये अझी बी बचीरा हा। बधलदे उत्पादना रे संबंधा होर पद्धति के जाति व्यवस्था बिच यों बदलाव आवहाएं।


शासक वर्ग जाति रा किहां इस्तेमाल करहां? शासक वर्ग दमित, शोषित होर शासित लोका जो आपु मंझ ग्रेडेड इनइक्वलिटी यानि संस्तरीबद्ध असमानता बिच बांडी रखहां। चाहे तिन्हा रा आनुवांशिक श्रम विभाजन खत्म बी क्युं नी हुई जाओ पर तेबे बे सजातिय ब्याह तिन्हा जो बान्ही रखहां होर संस्तरीबद्ध असमानता बणीरी रैहाईं। यानि 77 प्रतिशत मेहनतकश आबादी जो विभाजित रखहां। आनंद तेलतुमडे बोल्हाएं कास्ट डिवाइडस क्लास यूनाईटस। दूजी गल्ल शासक वर्ग लूटा रे माला रा बंटवारा यानि के संसाधन होर राजनैतिक सत्ता बिच केसरी भागीदारी कितनी हुणी इधी कठे आपसी प्रतिस्पर्धा बिच से आपणे जाति रे ब्लॉका रे जरिये प्रतियोगिता करहां। तरीजे वोट बैंका री राजनीति बिच जाति अस्मिता रा इस्तेमाल करहां। चुनावा बिच जीतणे रा फार्मुला जातिगत समीकरणा के तैयार हुआं। चौथे जातियां रे विघटना री प्रक्रिया कम हुई गईरी। अब कई जातियां राजनैतिक गठजोड बनाई करहाईं पर स्यों सामाजिक गठजोड नीं बनाई करदी। अब यूनिफाइड लेबर कोड बनाणे री गल्ला साम्हणे आई करहाईं। जेता रे मुताबिक अप्रैंटिस, ट्रेनी मजदूरा जो स्थायी मजदूरा री जगहा रखी सकाहें। न्यूनतम वेतना पर जितना समय काम करवाणा चाहो तो करवाई सकाहें। पैहले करीब 290 दिन पूरे हुणे पर मजदूरा जो स्थायी करना पौहां था से अब खत्म हुई जाणा। अल्पसंख्यक पूँजीपतियां री राज्य सत्ता ये जाति व्यवस्था कधी बी खत्म नीं करनी। आसे मौजूदा आरक्षणा जो खत्म करने री मांग नीं करदे पर नौवीं जातियां जो शामिल करने रे पक्षा बिच नीं हे। शिक्षा होर नौकरी बिच सीटा हे नीं ही। लगभग 2.1 प्रतिशता री रफ्तारा के सरकारी नौकरियां घटी करहाईं। वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलना रा मसला हुणा चहिए सभीयां कठे एक समान होर निःशुल्क शिक्षा होर सभी कठे रोजगार। संवैधानिक संशोधन करीके ये अधिकार मूल अधिकारा बिच शामिल कितेया जाणा चहिए। ये अधिकार कई देशा बिच दितेया गइरा। अगर राज्य ये नीं देई पाओ ता तिन्हां जो भरण-पोषणा कठे भत्ता देणा चहिए। हालांकि बेरोजगारी भत्ते रे बारे बिच संविधाना रे दिशा निर्देशक सिद्धांत बिच लिखिरा बी हा। आरक्षण आजा रे समया बिच लोकतांत्रिक अधिकार नीं हा बल्कि लोकतांत्रिक भ्रम ज्यादा हा।


Sunday, May 12, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-3



अपणिया भासा च समाज दे बारे च, समाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाला जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखा दे हन। इसा माला दा पैह्ला मणका असां कुछ चिर पैह्लें पेश कीता था। फिरी पहाड़ी भाषा पर चर्चा चली पई। हुण एह लेमाला फिरी सुरू कीती है जिसा दा दुआ मणका तुसां पढ़ेया। अज पढ़ा इसा दा त्रीया मणका।


ब्राह्मणवादा रा चरित्र हर युगा बिच शासक वर्गा जो आपणे शासना जो ठीकठहराणे रा धार्मिक होर कर्मकांडिय वैधीकरण देणा हा। डी डी कोसाम्बी री कताबमिथक होर यथार्थ एस चरित्र जो समझाणे कठे बड़ी उपयोगी मनी जाहीं। 1700 ई.पू. ले छठी शताब्दी ई. तक उत्पादन रे संबंध बड़े पैमाने पर बधले। योंबदलाव पुराणे कर्मकांडा रे ढांचे बिच भूकंप रे झटके थे। दक्षिण भारत बिचब्राह्मणवादे सत शुद्र होर असत शुद्रा रा विभाजन कितेया। जेता बिच सत शुद्रब्राह्मणा रे संरक्षक मने गए होर तिन्हा री क्षत्रिया री भूमिका स्वीकारकिती गई। आंध्रा बिच रेड्डी राजे पैदा हुए। हालांकि छठी सदी ई. बिचहर्षवर्धन एक वैश्य राजा था। पर दक्षिण भारत होर पूर्वी भारता बिच वैश्यहोर क्षत्रिय जातियां नीं थी। मारवाड़ियां री वैश्य जाती बादा बिच पूर्वीभारता जो गई थी। दक्षिण होर पुर्वा बिच सिर्फ ब्राह्मण होर शुद्र ही थे।वर्ण व्यवस्था अगर केसी ग्रन्था ले निकली री हुंदी ता ये व्यवस्था हर जगहाएक बराबर ही हुंदी होर एता बिच देश-काला रे आधार पर अंतर नीं हुंदा।

जाति व्यवस्था रा उत्पादन संबंध होर वर्ग संबंधा के रिश्ता समझणे ले आसेजाती रे इन्हा परिवर्तना जो समझी सकाहें। इतिहासा री हर घटना बिच कार्य होरकारणा (कौज एंड इफेक्ट) रा संबंध हुआं। इतिहासकारा जो ये कार्य कारण संबंधसमझणा चहिए ताकि इन्हा री व्याख्या भौतिक, राजनैतिक होर सामाजिक परिवर्तनारे मुताबिक किती जाई सके होर ये दसी सको भई सभी ले महत्वपूर्ण परिवर्तनक्या हा। जिंदा रैहणे कठे इंसाना जो रोटी, कपड़ा होर मकान चहिए हुआं।इंसाना री बुनियादी गतिविधि हुआईं उत्पादना री गतिविधि। उत्पादना बिचसामूहिक श्रम विभाजन, विनिमय, विनियोजना रा रिश्ता, मालिकाने रे संबंध होरमुनाफा यानि सरप्लस लूटने रे आधार पर कोई व्यवस्था खडीरी हुआईं। जटिला लेजटिल सामाजिक सांस्कृतिक (जाति) अधिरचना हो चाहे या कोई साधारण अधिरचना,इन्हा संबंधा के तेतारे रिश्ते दसे बगैर तेता बिच हुणे वाले परिवर्तन समझनीं आई सकदे। अगर परिवर्तन समझणा जाति-वर्ण व्यवस्था बिच ता उत्पादन संबंधाबिच जाणा हे पौणा। धार्मिक ग्रंथा रे मुताबिक राजे रा धर्म हा वर्ण आश्रमव्यवस्था री हिफाजत करना। इधी कठे कई अधिकारी नियुक्त किते गइरे थे जिन्हारा नावं हे धर्माधिकारी था। 12वीं सदी ई. बिच बंगाला रे बल्लाल सेन राजे रेकाला बिच एकी अंत्यज जाति कैवर्ते विद्रोह करी दितेया था ता दबाबा बिचकैवर्त जाति जो शुद्रा रा दर्जा देणा पया था। एकी तुगलक राजे क्षत्रिय समूहसुनार बणाई दितेया था।


जाति वर्ण व्यवस्था क्या ही? वर्ग विभाजना रे तौरा पर ये वैदिक काला रेउतरार्धा बिच पैदा हुई। ब्राह्मण होर ब्राह्मणवादी विचारधारा रा इस्तेमालकरी के तेस वक्ता रे शासक वर्ग समुच्चये (ब्राह्मण, क्षत्रिय), तेस वक्तारे वर्ग विभाजना जो आपणे वर्ग विशेषाधिकारा जो सुरक्षित रखणे कठे होरसजातीय ब्याह रे जरिये एता री निरंतरता बनायी रखणे कठे धार्मिक होरकर्मकांडीकरणा करी के एस व्यवस्था रा अश्मीभूतीकरण या जीवाश्मीकरण कितेया।

उत्पादन प्रकृति के सौगी आदमी री अंतःक्रिया ही। ये अंतःक्रिया सदा गतिमानरैहाईं। एतारे बदलने ले उत्पादना री पद्धति बदलाहीं। पद्धति बदलणे लेउत्पादना रे रिश्ते बदलाहें। विनिमया रे संबंध बदली जाहें। वर्ग संबंध बदलीजाहें। पर जाति व्यवस्था तुलनात्मक रूपा के स्थिर हुई गई। बदलदे हुएउत्पादन संबंधा के जाति व्यवस्था रे पुराणे खांचे रे वर्ग संबंधा बिच घुटनआउंदी लगाहीं। एते जाति व्यवस्था रे कर्मकांडिय ढांचे मंझ भूकंप रे झटकेपैदा हुआएं। जेते संलयन होर विखंडना री प्रक्रिया शुरू हुआईं। ब्राह्मणवादीविचारधारा नौवीं स्थितियां मंझ नौवें शासक वर्गा रे समुच्चय जो बनाई रखणेकठे जातिगत पदानुक्रमा जो भी के अडजस्ट करदी रैहाईं।जाति होर वर्गा रा क्या संबंध हा? जाति आज भी आंशिक तौरा पर श्रम विभाजनाजो, विनमय होर वितरणा जो प्रभावित होर निर्देशित करी करहाईं। जाति पूरीतरहा के अधिसंरचना रा अंग नीं ही। जाति पैदा हे वर्ग विभाजना ले हुईरी।जाति होर वर्गा रा रिश्ता संगति रा रिश्ता हा। बदलदे वर्ग संबंध होरउत्पादन संबंध जाति रे बदलाव बिच निर्धारक भूमिका निभाहें। विचारधारा रेचश्मे ले आसे दुनिया देखाहें।मध्यकालीन भारता बिच जाति रा स्वरूप1700 ई.पू.-1100 ई. तका रे काला बिच जाति व्यवस्था चारावाह समाज, प्राकसामंती किसान अर्थव्यवस्था ले सामंती व्यवस्था रे दौरा तक हुंदी हुई 1 सदीई. ले 5वीं सदी तका परिपक्व हुआईं। जबकि अलग रूप 7,8,9वीं सदी ई. बिच धारणकरहाईं जेबे गुप्त साम्राज्य रा पतन हुआं होर छोटे-छोटेक्षेत्रिय राज्यबणहाएं। जाति व्यवस्था बदलदे आर्थिक सामाजिक संबंधों, उत्पादन रे संबंधोंहोर बदलदी हुई उत्पादना री पद्धति के सौगी ढांचागत परिवर्तन किहां आवहां येआसे अझी तका देखया।ब्रिटिश शासना रे दौरान जाति-व्यवस्था रा चरित्रअंग्रेजी शासना री शुरूआता बिच भारत रा स्वरूप क्या था एता रे बारे बिच सी एबैली री कताब ही रूलर्स, टाउनमैन एंड बाजार। अंग्रेजी शासना बिच जेमहत्वपूर्ण बदलाव आए तिन्हा जो आसे इहां रेखांकित करी सकाहें। पहला बदलावआया भूमि री व्यवस्था बिच। भूमि रा स्थाई बंदोबस्त कितया जाहां। यू पी, बंगाल होर बिहारा बिच जमींदारी बंदोबस्त, हरियाणा होर पंजाबा बिच रैयतवाड़ीव्यवस्था होर गुजरात, पश्चिमी भारता बिच महालवाड़ी व्यवस्था लागू हुआईं।स्वर्ण जमींदार या मध्यम किसान जमींदारा जो जमीना रा मालिक बनाणे रा कामपैहली बार भारता रे इतिहासा बिच ब्रिटिश उपनिवेश काला बिच हुआं। 2014-15 रेआंकड़ेयां रे मुताबिक भारता बिच सारे भूमिहीन मजदूरा रा 48 प्रतिशत दलितमजदूर हा। कुल ग्रामीण दलित आबादी बिच 85 ले 90 प्रतिशत दलित आबादी भूमिहीनमजदूर ही। एता रा कारण हा औपनिवेशिक लगान व्यवस्था।दूजा बदलाव ब्रिटिश काला बिच ये आया भई उद्योग होर रेलवे बगैरा रा सीमितविकास हुआ। एता के जाति व्यवस्था बिच बड़ा परिवर्तन आया। बम्बई, अहमदाबाद, ढाका, सूरत, कलकता, कानपुर, मद्रास, तिरूपुर साहीं कई शहरी औद्योगिककेन्द्र विकसित हुए। यातायात रे साधन विकसित हुए। दलित, शूद्र, आदिवासी होरभूमीहीन हे मुख्य रूपा के मजदूर बने। औद्योगिकरण होर शहरीकरणा के जाति रीविशिष्टता आनुवांशिक श्रम होर छुआछात कमजोर हुई।तरीजा बदलाव था एथनोग्राफिक स्टेट बणना यानि प्रजा री गिनती करना होरवर्गीकृत करना। एता रा मकसद था शासित जनता पर बेहतर तरीके के शासन करना। एचएच रिजले ब्रिटिश एथनोग्राफिक थे तिन्हें जातियां होर जनजातियां रा अध्ययनकितेया। विलियम जोन्स ओरिएंटल सोसायटी आफ इंडिया बणाहें। एता बिच स्यों दोवर्गा रे लोका जो भर्ती करहाएं ब्राह्मण होर मौलवी। भारता पर राज करने कठेभारता जो समझणा जरूरी था। धार्मिक ग्रन्था रे अनुवाद किते गए अंग्रजी बिच।जर्मन इंडोलोजिस्ट मैक्स मूलर संस्कृता रा अध्ययन करी के इन्हा रा अनुवादकरहाएं। सन 1881 ई. बिच पैहली जनगणना हुआईं। एस जनगणना बिच पैहली बारजातियां री गणना किती जाहीं ओर जातियां रा वर्गीकरण कितया जाहां। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र होर अस्पृश्य जातियां री निशानदेही साफ रूपा केरेखांकित किती गई।जाति स्थिर करी दिती गई। पैहले जाति बिच थोड़ी बौहत गतिरैहाईं थी। पर ये गति अब कानूनी दस्तावेजा के बंद करी दिती गई। एथनोग्राफिकस्टेट रा मतलब हा एथनिक पहचान रे रूपा बिच जातिगत, राष्ट्रीय, भाषाई, क्षेत्रगत जनता जो जोड़ना होर वर्गीकृत करना। सबअल्टर्न इतिहासकार निकोलसडर्क बोल्हाएं भई जाति व्यवस्था जो रूढ़ीबद्ध होर कठोर बनाणे ले जाति री गतिखत्म हुई गई होर जातियां रे बिच विभाजक रेखा खींची दिती गई। यानि जातिव्यवस्था अंग्रेजे मजबूत हे किती।अंग्रेज जेबे देश छाड़ी के जांदे लगीरे थे ता भारता रे सामंत, राजे रजवाडेहोर जमींदार तिन्हा बाले गए होर तिन्हा जो बोल्या भई तुसे भारत छाडी के नींजावा नीं ता सब कुछ बर्बाद हुई जाणा। ज्योति बा फूले बी अंग्रेजा रे प्रतिपैहले आशावादी थे। तिन्हा री रचना गुलामगिरी बिच ये आशावाद देखणे जोमिल्हां पर वक्ता रे सौगी-सौगी तिन्हा रा अंग्रेजा ले मोह भंग हुआँ होरस्यों अंग्रेजा री कड़ी आलोचना करहाएं। एतारे हवाले तिन्हा री बादा बिचलिखिरी कताब किसाना रा कोड़ा बिच मिलहाएं। अंबेदकर बी फैमिन इन इंडिया बिचअंग्रेजा री आलोचना करहाएं। पर पश्चिमी शिक्षा रे दरवाजे दलिता कठे खोलणेरी वजह ले अंग्रेजा रे प्रशंसक थे। (हालांकि यों दरवाजे हर जगह नहीं खोलेगए थे)। आनंद तेलतुमडे री कताब महाड हाखियां खोलणे वाली कताब ही। हालांकिअंग्रेजे शुरू बिच दलिता कठे सेना री भर्ती खोली थी पर 1891-92 बिच ये बंदकरी दिती थी। उच्च वर्णा री स्थिति अंग्रजी काला बिच बी उच्च हे बणीरीरैही। ब्रिटिश काला बिच जातियां री विभाजक रेखा कानूनी रूपा के रेखांकितहोर पारिभाषित हुई जाहीं जे जातिगत पदानुक्रमा जो रूढ़ बणायी देहाईं। जातिरा एक अश्मीभूतीकरण ब्राह्मणे कितेया था फेरी ब्रिटिश शासने कितेया। एस सीहोर एस टी री कैटागरी बणी जाहीं। अंग्रेज शासन काला रा फायदा दलित आबादी रेसिर्फ दो प्रतिशत लोका जो हे हुआ होर मुख्य तौरा पर दलित जातियां रानुकसान हे हुआ।

इतिहासकार इरफान हबीब होर वी के ठाकुर री कताब ही दि वैदिक एज। तेता बिचस्यों बोल्हाएं भई तुर्क होर मुगल शासके भारता रे सरप्लस लूटणे रा तरीकाबिल्कुल नीं छेड़या। मुस्लिमे सिर्फ दो चीजा कठे हिंदू धर्मा री आलोचनाकितिरी। स्यों थे बहुदेववाद होर मूर्तिपूजा। जबकि जाति व्यस्था री बिल्कुलबी आलोचना नीं कितिरी। सिर्फ अल्बेरूनिए कुछ आलोचनात्मक गल्लां लिखिरी भई येठीक नहीं हा होर आसे मुस्लिम एहड़े नीं हुई सकदे। सौगी-सौगी तिन्हे एहड़ा बीबोल्या भई व्यवस्था ये बड़ी जबरदस्त ही होर बडी कारगर ही। केसी बी मुस्लिमशासके, सकॉलरे, यात्रिये जियां बर्नी (आइने तुगलक) समेत सभीयें जातिव्यवस्था री प्रशंसा हे कितिरी। मुस्लिम शासके सिर्फ इथी रे राजा हे अपदस्थकिते जबकि राजकाज रे निचले ढांचे के तिन्हें रिश्ता बणायी रखया होर सामंतीभूस्वामी, ब्राह्मण होर क्षत्रिया के गठजोड़ बणाया। इन्हां जो सैनिकटुकड़ियां रखणे री इजाजत दिती गई बशर्ते स्यों लगान देंदे रौहो। हालांकिइन्हा रे नावं बदली गई मनसबदार, जमींदार बगैरा यानि सिर्फ प्रशासनिक स्तरापर नावं बदलने जो लैई के छेड़छाड़ हुई। जबकि श्रम विभाजन, मुक्त किसान होरखेतीहर मजदूरा री व्यवस्था के तिन्हें कोई छेड़छाड़ नीं किती।