Saturday, November 16, 2019

पंजाबी कविता




उर्दू कनै पंजाबी दे कवि मनीर नियाज़ी होरां दी 
इक पंजाबी कविता दा पहाड़िया, हिन्दिया कनैं अंगरेजिया च अनुवाद दा नंद लेया। 
अनुवाद असांं दे प्‍यारे कवि कनै पत्रकार नवनीत शर्मा होरां कीतेयो। 
गुरुमुखी लिपि च मूल कविता भी पेश है।


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कांगड़ी
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क्‍लोकणी गल

कल बैठी की सोचा दा था
गल कोई बितेयो बेले दी
अपणे ग्रांए दे पिपले थल्‍लैं
छोटिया ईदा दे मेले दी
मैं जेहड़ा मसहूर है इतणा
मने दे भेद लकाह्णे बिच
गमे दी तिक्‍खी चींड लकाह्ई
बाहरैं हसदेयां जाणे बिच
तिस्‍सी पराणे ध्‍याडे़ अंदरैं
याद करी इक मौके जो
लाई जोर नी रोकी सकेया
अपणे दिले दे हौके जो

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ਪੰਜਾਬੀ
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ਕੱਲ ਦੀ ਗੱਲ

ਕੱਲ ਬੈਠਾ ਕੁਝ ਸੋਚ ਰਿਹਾ ਸਾਂ
ਗੱਲ ਇੱਕ ਗੁੱਜਰੇ ਵੇਲੇ ਦੀ
ਆਪਣੇ ਪਿੰਡ ਦੇ ਪਿੱਪਲਾਂ ਹੇਠਾਂ
ਛੋਟੀ ਈਦ ਦੇ ਮੇਲੇ ਦੀ
ਮੈਂ ਜੇਹੜਾ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹਾਂ ਏਨਾ
ਦਿੱਲ ਦੇ ਭੇਦ ਲੁਕਾਵਣ ਵਿੱਚ
ਗ਼ਮ ਦੀ ਤਿੱਖੀ ਚੀਖ ਨੂੰ ਘੁੱਟ ਕੇ
ਉਪਰੋਂ ਹੱਸਦਾ ਜਾਵਾਂ ਵਿੱਚ
ਓਸ ਪੁਰਾਣੇ ਦਿਨ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ
ਕਰਕੇ ਯਾਦ ਇੱਕ ਮੌਕੇ ਨੂੰ
ਜੋਰ ਵੀ ਲਾ ਕੇ ਰੋਕ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਆਪਣੇ ਦਿੱਲ ਦੇ ਹੌਕੇ ਨੂੰ...

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हिंदी
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कल की बात

कल बैठा कुछ सोच रहा था
बात थी गुज़रे लम्‍हे की
अपने गांव के पीपल नीचे
छोटी ईद के मेले की
मैं ये जो मशहूर हूं इतना
दिल के भेद छुपाने में
ग़म की तीखी चीख घोंट कर
बाहर हंसते जाने में
उसी पुराने दिन के बीच से
करके याद इक मौके को
ज़ोर भी मारा रोक न पाया
अपने दिल की हूक को मैं

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English
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It happened only yesterday

Was thinking only yesterday
Something that had elapsed already
About the fair of Eid
Beneath the shade of my village banyan 
I, who is well known
For hiding the pangs of my heart
Clad are the shrilling cries of my heart
In the laughter I shower apparently
From one such old day
After remembering a moment
I tried my best but could not stop
The silent cry of the inmost heart.

नवनीत शर्मा

Monday, October 21, 2019

पंजाबी कविता


दर्शन बुट्टर 

                                            पंजाबी कवि दर्शन बुट्टर होरां दी इक होर कविता। 



                     इतणी क गल 

गल ता सिर्फ इतणी थी
भई काणे घासिए दी घसयारनें
मळ्ही ते चक्‍की  
लिपस्टिक लाई नै छपड़े च मुंह दिखेया

इतणी क गल थी न!

छपड़े पर मीनकां दी  
ट्रैं ट्रैं हाली भी कजो चलियो

गल ता सिर्फ इतणी थी
भई डाक गडिया च आया सुरमा
पंज रतियां ते जरा क घट था
चंद्रमे साही चंदकोर  
बह्रले नै रस्‍सा लपेटी नै कैंह् लमकी गई  
गल ता सिर्फ इतणी थी  
भई अज भ्‍यागा भ्‍यागा
ग्रां दिया हद्दा पर आई नै
सूरजे दिया साइकला दी
चेन उतरी गई
एह् ग्रां आळे  
बुझियां लालटैनां पकड़ी कुती जो दौड़दे जा दे  
गल ता सिर्फ इतणी थी  
भई बाज दे पंजे ते छुट्टियां  
चिड़ियां दा फंग
लम्‍मे रस्‍ते च आई पेया
ग्राएं दा सखणा अंबर
संझा तिक  
फंह्गां दियां डारां नै किञा भरोई गेया  
गल ता सिर्फ इतणी क थी  
पर गल सिर्फ इतणी क ही कैंह् थी ... ? … ? 
अनुवाद: अनूप सेठी

                        देवनागरी लिपिया च मूल पंजाबी कवता 


                        ऐनी कु गल्ल
                        गल्ल तां सिर्फ ऐनी सी
                        कि घीचर काणे दी घीचो ने
                        रूढ़ियां तों थियाई
                        लिप्स्टिक ला के छप्पड़ च मुंह वेखिया

                        ऐनी कु गल्ल सी ना!

                        छप्पड़ दे डड्डूआं दी
                        टरैं टरैं अजे वी क्यूं जारी है

                        गल्ल तां सिर्फ ऐनी सी
                        कि डाक गड्डी विच आया सुरमा
                        पंज रतियां तों जरा कु घट्ट सी
                        चन्न वरगी चंदकुर
                        लटैण नाल रस्सा लपेट के कियूं लमक गई

                        गल्ल तां सिर्फ ऐनी सी
                        कि अज सवेरे सवेरे
                        पिंड दी फिरनी ते आ के
                        सूरज दे साइकिल दी
                        चैन उतर गई
                        इह पिंड वाले
                        बुझियां लालटैनां फड़ी किधर भज्जी जांदे ने
                        गल्ल तां सिर्फ ऐनी कु सी
                        कि बाज दे पंजे चौं छुट्टी
                        चिड़ी दा खंभ
                        लम्मी पही च आ डिगिया
                        पिंड दा सखणा असमान
                        आथण तीक
                        खंभा दियां डारां नाल किवें भर गिया

                        गल्ल तां सिर्फ ऐनी कु सी
                        पर गल्ल तां सिर्फ ऐनी कु ही क्यूं सी ...?...?...?

Thursday, September 5, 2019

पंजाबी कविता



पंजाबी कवि दर्शन बुट्टर होरां दी कविता। 

                     घर वापसी

हटी आया मैं
पता नीं कुन्‍हां कुन्‍हां  
नछत्‍तरां गाह्यी नै  
मेरेया ग्रां!

मैं हुण
अजकणे रथे दा
लगामा बगैर
पल पल घसोंदा पहिया है

मैं हिमालय हथ्याळिया पर मीथ्‍या
ग्लोबे जो किक मारी
इलाके खीसे च पाए
पर सांत नी करी सकेया
अपणिया रूहा दे कलपदे मोरे जो

मेरेया ग्रां!
तेरियां चरांदां च
टोळा दा है मैं  
कुतकी गुआची गेह्यो
तिस गोल मटोल मुंडुए जो

तिस शरारती छोह्रुए जो
जेह्ड़ा म्‍हैसी दिया पूछा पकड़ी
टोह्बे दे हिंद महासागरे
पार करी लैंदा हा

तिस जुआने जो जिह्दियां मसां फुटणा लगियां थियां
जेह्ड़ा सूरजे जो
साफे दे लड़े नै बह्न्‍नी नै  
चंद्रमे दिया डाह्टिया नै  
फसलां बढदा हा  

मैं टोळा दा
बापुए दे
तिस पढ़ाकूए पुतरे जो  
जिह्दियां कताबां
आढ़तिए दिया बहिया जो  
गलत सिद्ध नी करी सकियां

तिस हारेयो जोद्धे जो
जेह्ड़ा सड़ेयो- गळयो नजामे दिया छातिया च
बरूद बणी फटी नी सकेया

मेरेया ग्रां!
दूर नछत्‍तरां ते वापस आयो
इस ओपरे जेह् आदमिए जो
जरा दस्‍स ता सही
कुतू है सैह्
'गोल मटोल जेह्या मुंडू' 
अनुवाद : अनूप सेठी, सलाह : तेज सेठी


नागरी लिपिया च मूल पंजाबी कवता

घर वापसी
परत आइया हां मैं
पता नईं किहड़े किहड़े
नच्छत्तरां नूं गाह् के
मेरे पिंड!
मैं हुण
वरतमान दे रथ दा
वाग विहूणा
पल पल घसदा पहिया हां

मैं हिमाला नूं तळी ते मसलिया
गलोब नूं किक मारी
खित्तीयां नूं जेब च पाया
पर शांत न कर सकिया
आपणी रूह दे कलपते मोर नूं

मेरे पिंड!
तेरी जूह चों
तलाश रिहा हां मैं
किधरे गुआच गए
उस गोलू-मोलू जिहे मुंडे नूं

उस इल्लती छोकरे नूं
जो मज्झ दी पुछ फड़ के
टोभे दा हिंद महासागर
गाह लैंदा सी

उस मुछ-फुट गभरू नूं
जो सूरज नूं
साफे लड़ बन्ह के
चन दी दाती नाल
हाड़ी वढदा सी

मैं तलाश रिहा हां
बापू दे
उस पढ़ाकू पुत्त नूं
जिस दियां कताबां
आढ़तिए दी वही नूं
गलत न सिद्ध कर सकियां

उस हारे होए योद्धे नूं

जो गले सड़े निजाम दी
हिक विच
बारूद बण के, फट न सकिया

मेरे पिंड!
दूर नच्छतरां तों परते
इस उपरे जिहे बंदे नूं
जरा दस तां सही
कित्थे है उह
गोलू मोलू जिहा मुंडा 

Sunday, July 14, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-10




अपणिया भासा च समाजा दे बारे चसमाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाळा जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखी।  इसा माळा दे नौ मणके तुसां पढ़े। पैह्लकें जमानैं ज्ञान विज्ञान कताबां ते ई हासल हुंदा था। अजकल इसा दुनिया जो समझणे दे कनै अपणी गल करने दे कई साधन आई गै। कताबां दा लखोया सोशल मीडिया च औआ दा। यूट्यूब पर कई कुछ है। कूड़ा भी बड़ा है पर तिस पासें ध्‍यान कजो देणा। कूड़ा सभनीं जगहां है। दमागां च भी। पर इसा लेखामाला दी खूबी एह भी है भई समीर होरां यूट्यूबा पर मजदूर बिगुल दे वीडियो दिक्‍खी नै नोट्स लै फिरी अपणिया भासा च लिखे। इन्‍हां लेखां च तिन्‍हां दीीअपणी बौद्धिक त्‍यारी भी नजर आई जांदी। इतिहास वर्तमान जो दिखणे कनै विश्‍लेषण करने दी तिन्‍हां दी इक दृष्‍टि है, इक दृष्‍टिकोण है। असां तिन्हां जो बिनती कीती भई इन्‍हां लेखां च सामग्री कइयां जगहां ते लइयो है ता तिन्‍हां दे हवाले भी देई देया। तां जे एह पक्‍का होई जाऐ भई गल्ला दा स्रोत है। कनै जे कोई होर डुग्‍घे जाणा चाहै ता तिह्जो असानी होई जाऐ। इस करी ने असां संदर्भ सूची एथी देया दे हन। 


इन्‍हां लेखां दिया भासा च हिंदिया दे बड़े शब्‍द हन। एह् सोचणे आळी गल है। जितणा जादा लखोंगा, तितणा ई भासा दा विस्तार होणा है। दूई गल समीर होरां लिखया भई एह लेख मंडयालिया च हन। एह सच भी है। तिन्‍हां अपणे लेखन दी शुरूआत दे बारे च असां दे गलाणे पर लिखी नै भेजया, तिस च भी मंडियालिया दा जिक्र है। असां तिन्हां जो पुच्‍छेया भई इसा जो हिमाचली या पहाड़ी कैंह् न गलाइए। समीर होरां इसा गिरहा जो खोलणे दी तयारी करा दे हन। तिन्हां दा आत्‍मकथन कनै असां दे सुआले दा जवाब गांह् तुसां तक पुजांगे। फिलहाल एह सूची दिक्‍खा।        
    

संदर्भ सूची 


  1. ऋग्वेद- पुरूष सुक्ता रा 10वां मंडला बिच वर्णाश्रमा रा जिक्र
  2. पाणिनी री 200 ई.पू. बिच लिखिरी अष्टाध्यायी बिच जाति शब्दा रा पैहला जिक्र
  3. एस हे बक्ता बिच वारहमिहिरा री बृहत संहिता
  4. याज्ञवल्क्य स्मृति बिच जाती होर वर्ण शब्दा रा एकी जगहा हे अलग इस्तेमाल हुईरा
  5. ऋग्वेदा रे 8वें खण्डा री 46 श्रुति रे रचयिता अश्व
  6. ऋग्वेदा रे खण्ड 1,4 होर 6 - इन्द्रे दिवोदासा री मददा के शम्बरा रे खिलाफ युद्ध लडया था
  7. अर्थशास्त्रा रे खंड तीना रे प्वाइंट 13 बिच कौटिल्य- शुद्र एक आर्य हा
  8. पाणिनी रे कामा पर पतंजलि महाभाष्य लिखाहें - शुद्र स्यों आर्य थे
  9. मनुस्मृति बिच भी शुद्रा रे आर्य हुणे रा जिक्र आवहां
  10. ब्रुस लिंकन होर जॉर्नेस दुबेदिले दुनिया रे अलग-2 जगहा रे चारावाह समाजा पर अध्ययन कितिरा।
  11. रोमिला थापरा री गिफ्ट इकानॉमी पर कल्चुरल पास्ट
  12.  आर एस शर्मा री वर्ग पूर्व सामाजिक संस्तरीकरण (प्री क्लास स्ट्रैटीफिकेशन) महत्वपुर्ण कताबा ही।
  13. अगर भारता रे समाजा जो समझणा हो ता डी डी कोशाम्बी री कताबा जरूर पढनी चहिए।
  14. जाती रे उदगमा पर इतिहासकार सुविरा जायसवाला री कताबा बी जरूर पढनी चहिए।
  15. मिथिला रा 14वीं शताब्दी रा रिकार्ड हा वर्ण रत्नाकर जेता बिच 96 वर्णा रा जिक्र कितिरा।
  16. कौटिल्ये लिखीरा भई काराधान होर सिंचाई व्यवस्था बगैरा रा प्रबंध ब्राह्मण हे करहाएं थे।
  17. अस्पृश्यता पर विवेकानंद झा रा बौहत अच्छा अध्ययन हा।
  18. छठी सदी ई. बिच वराहमिहिर दसहाएं भई सभी राजाओं जो हर धार्मिक समारोहा बिच पशु रा मांस खाणा चहिए।
  19. डी डी कोसाम्बी री कताब मिथक होर यथार्थ ब्राहमणवादा रे चरित्रा जो समझाणे कठे बडी उपयोगी मनी जाहीं।
  20. इतिहासकार इरफान हबीब होर वी के ठाकुर री कताब ही दि वैदिक एज।
  21. एच एच रिजले ब्रिटिश एथनोग्राफिक थे तिन्हें जातियां होर जनजातियां रा अध्ययन कितेया।
  22. जर्मन इंडोलोजिस्ट मैक्स मुलर संस्कृता रा अध्ययन करी के इन्हा रा अनुवाद करहाएं।
  23. सबअल्टर्न इतिहासकार निकोलस डर्क बोल्हाएं भई जाति व्यवस्था जो रूढीबद्ध होर कठोर बनाणे ले जाति री गति खत्म हुई गई होर जातियां रे बिच विभाजक रेखा खींची दिती गई। यानि जाति व्यवस्था अंग्रेजे मजबूत हे किती।
  24. ज्योति बा फूले बी अंग्रेजा रे प्रति पैहले आशावादी थे। तिन्हा री रचना गुलामगिरी बिच ये आशावाद देखणे जो मिल्हां पर वक्ता रे सौगी-सौगी तिन्हा रा अंग्रेजा ले मोह भंग हुआँ होर स्यों अंग्रेजा री कडी आलोचना करहाएं। एतारे हवाले तिन्हा री बादा बिच लिखिरी कताब किसाना रा कोड़ा बिच मिलहाएं।
  25. अंबेदकर बी फैमिन इन इंडिया बिच अंग्रेजा री आलोचना करहाएं। पर पश्चिमी शिक्षा रे दरवाजे दलिता कठे खोलणे री वजह ले अंग्रेजा रे प्रशंसक थे। (हालांकि यों दरवाजे हर जगह नहीं खोले गए थे)।
  26. आनंद तेलतुमडे री कताब महाड हाखियां खोलणे वाली कताब ही।
  27. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1935
  28. भूमि सुधार कठे लैंड सिलिंग एक्ट आवहां 1956-57 बिच।
  29. सत्यजीत रे री फिल्म जलसाघर।
  30. आनंद तेलतुमडे लिखाएं भई दलिता रा 89-90 प्रतिशत हिस्सा मजदूर हा पर 10-11 प्रतिशत हिस्सा साफ तौरा पर मजदूर नीं हा। ये हिस्सा मध्यम वर्गा रा संस्तर या उच्च वर्ग या कुलीन हुई चुकीरा।
  31. सामाजिक उत्पीडन आर्थिक उत्पीडना के गुंथित हुआं। गलोरिया रहेजा रा लेख हा एस बारे बिच सेंट्रलिटी ऑफ डोमिनेंट कास्ट।
  32. आनंद तेलतुमडे बोल्हाएं कास्ट डिवाइडस क्लास यूनाईटस।
  33. ज्योति बा फुले री सभी ले प्रसिद्ध रचना ही गुलामगिरी।
  34. 1881 बिच ज्योति बा फुले किसान का कोडा कताबा बिच लिखाहें भई ब्राह्मणा होर अंग्रेजा री चमड़ी उखाड़ी जाए ता एक हे खून निकलणा।
  35. थामस पेना रे विचार डिक्लेरेशन ऑफ राइटस ऑफ मैन, समानता, स्वतंत्रता होर भ्रातृत्वा रे उसूला ले प्रेरित थे।
  36. चार्ली चैपलिन री फिल्म गोल्ड रश
  37. बेंजामिन फ्रेंकलिना री कताब पुअर रिचर्डस अलमानैक अमेरिकी समाजा जो प्रभावित करहाईं। व्यक्तिवाद सामहणे आवहां।
  38. सन 1897 ईं बिच जॉन ड्युई रा लेख छपया था कॉमन फेथ।
  39. डा. जेफरलोट क्रिस्टोबे री कताब डा. अंबेदकर एंड अनटचेबिलिटी बिच स्यों अंबेदकरा री चार राजनैतिक रणनीतियां रे बारे बिच दसहाएं।
  40. डा. अंबेदकरा री कताब आवहाईं व्हू वर शुद्रास।
  41. तरीजी रचना तिन्हारी आई, अनटचेबलः व्हू वर दे एंड हाउ दे बिकम अनटचेबल।
  42. प्रसिद्ध इतिहासकार सुविरा जायसवाल बोल्हाईं जाति निजी संपति पितृसत्ता होर वर्गा के सौगी पैदा हुई थी होर जाति निजी संपति पितृसत्ता होर वर्गा रे सौगी हे खत्म हुई सकाहीं। 




Sunday, June 30, 2019

जाति व्यवस्थाः उदगम, विकास होर जाती रे अंता रा प्रश्न (मंडयाली लेख)-9




अपणिया भासा च समाज दे बारे चसमाज दे विकासा दे बारे च लेखां दे मार्फत जानकारी हासल करने दा अपणा ही मजा है। समीर कश्‍यप होरां इक लेखमाला जाति व्‍यवस्था दे विकास पर लिखा दे हन। इसा माळा दा पैह्ला मणका असां कुछ चिर पैह्लें पेश कीता था। फिरी पहाड़ी भाषा पर चर्चा चली पई। हुण एह लेखमाला फिरी सुरू कीती है। सत लेख तुसां पढ़ी लै, अज पढ़ा इसा लेखमाळा दा नौउआं मणका।

जाति उन्मूलना रा कार्यक्रमः कुछ शुरूआती प्रस्ताव


जाति रे उन्मूलना कठे आजा री जरूरत ही एक वर्ग आधारित जाति विरोध आंदोलन। क्या आसे जाति उन्मूलना री लड़ाई राज्यसत्ता रे सौगी बैरमोल लितिरे बिना लड़ी सकाहें? क्या भारता बिच राज्य सत्ता रा हमेशा ले हे जातिगत चरित्र नीं रैहिरा? क्या भारता बिच राज्य सत्ता रा पितृसतात्मक चरित्र नी रैहिरा? ये सोचणा आपणे आपा जो मूर्ख बनाणा नी हा भई राज्य सत्ता एक निष्पक्ष अभिकर्ता हुआईं, जेता रा केसी वर्गा रे सौगी कोई पक्ष नीं हुंदा होर जेता रे कोई जातिगत पूर्वाग्रह नीं हुंदे होर से वर्गा होर जातियां ले ऊपर कोई निष्पक्ष महान मध्यस्थ ही? क्या आसे उम्मीद करी सकाहें भई जाति रा उन्मूलन राज्य सत्ता रे अफर्मेटिव एक्शन यानि सामाजिक अनुशंसावादा रे जरिये हुई सकहां या सरकारी नौकरी मंझ दलित तबके ले लोक चली जाणे रे जरिये हुई सकहां, ये सोचदे हुए भई सरकारा रे सोचणे होर कार्यवाई करने जो आसे सरकारी नौकरियां बिच जाई के बदली सकाहें? क्या जाति उन्मूलना कठे कल्हा एक सामाजिक आंदोलन हुणा हे भतेरा हा? क्या जाति रा उन्मूलन पूरे सामाजिक आर्थिक ढांचे रे क्रान्तिकारी रूपान्तरणा रे बाझही संभव हा।? आसारा मनणा ये हा भई इन्हा सभी सवाला रा जबाब एक जोरदार नाह हा।

एतारा कारण ये हा भई सामाजिक अधिरचना हमेशा-हमेशा राजनैतिक अधिरचने संभाली री होर बचाई री हुआईं। सरकार होर राज्य सत्ता जातिगत उत्पीड़न या दमना रा समर्थन नीं करे ता से टिकिरी किहां रैही सकाहीं। डा. अंबेदकरा रे राजनैतिक प्रयोगा रा अनुभव दसहां भई ब्राह्मणवादा जो हमेशा ले राज्य सत्ता रा संरक्षण प्राप्त था चाहे से औपनिवेशिक राज्यसत्ता हो या चाहें मुस्लिम या हिंदू राज्य सत्ता रैहिरी हो। जाति रे खिलाफ लड़ना हो ता एस सारे राजनैतिक सत्ता रे ढ़ांचे रे खिलाफ जाणा पौणा। सामाजिक उत्पीड़न होर आर्थिक शोषण कधी बी अलग-अलग नीं हुंदे बल्कि स्यों अन्तर्गुन्थित रूपा के एजी दूजे के गुंथित हुआएं होर तिन्हा बिच द्वंद्वात्मक रिश्ता हुआं। राजनैतिक संरचना यानि सरकार जाति जो टिकाए रखणे रा मुख्य ढांचा हा। राज्य सत्ता रे बिना सामाजिक होर सांस्कृतिक अधिरचना टिकिरी नीं रैही सकदी। हालांकि ये बी सच हा भई सांस्कृतिक होर सामाजिक अधिरचना री एक सापेक्षित स्वायत्ता हुआईं होर से बी राजनैतिक अधिरचना जो प्रभावित करहाईं। कोई भी राजनैतिक अधिरचना एकी आर्थिक आधारा री सेवा करहाईं। एहड़ा कोई बी आर्थिक आधार जे शोषण होर दमना पर आधारित हो से विभिन्न प्रकारा रे सामाजिक उत्पीड़ना रे बगैर नीं चली सकदा, जेता बिच जाति उत्पीडन बी शामिल हुआं। पूँजीवादी शोषणा री सारी प्रक्रिया जातिवाद, ब्राह्मणवादी होर सामाजिक उत्पीड़ना रे सभी रूपा रा इस्तेमाल किते बगैर नीं चली सकदी। ये गल्ल बी सच ही भई जाति पूरी तरहा के अधिरचना रा हिस्सा नीं ही बल्कि ये आर्थिक आधारा रा हिस्सा बी बणहाईं। जाति चीजा रे वितरणा रे अनुपाता जो किथी ना किथी प्रभावित करहाईं। इधी कठे जाति उन्मूलना रा प्रश्न असलियता बिच समाजा रे क्रान्तिकारी रूपांतरणा रा प्रश्न हा। जाति रा अंत क्रान्ति रे बिना नी हुणा। आज क्रान्ति रा प्रश्न बी जाति रे प्रश्ना के तेहड़ा हे जुड़ीरा जेहड़ा जाति रा प्रश्न क्रान्ति के जुड़ीरा। क्रान्ति हुई हे नीं सकदी अगर आजा ले हे आसे वर्ग आधारित जाति विरोधा जो संगठित करने रा काम नीं करदे। वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलना रे कामा बिच केसी किस्मा रे अस्मितावाद, व्यवहारवाद होर अर्जी या आवेदनवादा री जगह नीं हुणी। हालांकि मुद्दे इन्हारे बी स्यों हुई सकाहें पर वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलना रा तरीका क्रान्तिकारी हुणा होर इन्हा ले अलग हुणा।

वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलना ले आसारा मतलब क्या हा। एस आंदोलना रा चरित्र एतारी प्राथमिकता ले निर्धारित हुआं। अस्मितावादा री राजनीति प्रतीकात्मक मुद्देयां जो वास्तविक मुद्देयां ले ज्यादा तरजीह देहाईं। हालांकि जिग्नेशा रा आंदोलन भौतिक मुद्देयां जो तरजीह देही करहां जे अच्छी गल्ल ही। जे प्रश्न वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलना उठाणे स्यों 89-90 प्रतिशत दलित आबादी जे मेहनतकश ही होर खेता खलियाना, कल-कारखानेयां बिच खट्टी करहाईं तिन्हा जो प्रभावित करने वाले हुणे। वर्ग आधारित मुद्देयां री पैहचाण किती जाणी चहिए। सभी थे बडा मुद्दा हा दलित विरोधी उत्पीड़ना री बधदी घटनावां रा। इन्हां मंझा 96-97 प्रतिशत घटना मजदूर वर्गा री दलित आबादी रे खिलाफ हुआईं। उत्पीड़ना रे माहौला रा सामना अस्मितावादी ढंगा के नीं हुई सकदा। क्योंकि एकी अस्मिता रे बड़े हुणे ले दुजी अस्मिता बी आपणे आप हे बडी हुंदी जाहीं। एतारा मुकाबला वर्ग आधारित आंदोलना के हे अस्मितावादी दुश्मणा रे खेमे मंझ काम करिके तिन्हा जो बेअसर या न्युट्रेलाइज करूआँ हे कितेया जाई सकहां। एता कठे सघन होर सतत जाति विरोधी प्रचार करना पौणा। खास करूआं मध्य जातियां बिच प्रचार कितेया जाणा चहिए। दुश्मणा री पैहचाण करवाई जाणी चहिए ज्यों कुलीन वर्गा रे रूपा बिच आपणी ही जाति मंझ मौजूद हुआएं। एक लंबी प्रक्रिया के ये मसला हल कितेया जाई सकहां होर अस्मितावादा होर मध्यम जातियां रे टकराव जो बेअसर या न्युट्रेलाइज कितेया जाई सकहां।

भारता रे संबंधा बिच वर्ग होर जाति रे संबंधा जो एक वाक्यांश प्रतिबिंबित करहां। ये वाक्यांश हा भई हर दलित उत्पीड़ित हा पर मेहनतकश वर्गा रा दलित उत्पीड़ना रे बर्बरतम रूपा रा शिकार हा। दूजी गल्ल भई हर मजदूर शोषित हा पर दलित मजदूर आपणी सामाजिक रूपा के आरक्षित स्थिति रे करूआं अतिशोषित हा। इधी कठे इन्हा मसलेयां पर प्राथमिकता निर्धारित किती जाणी चहिए। दूजा प्रश्ना हा सजातीय ब्याह। ये सच्चाई ही भई सजातीय ब्याह जातियां जो पुनर्उत्पादित करदा रैहां। एता कठे कई सांस्कृतिक गतिविधियां किती जाणी चहिए। जिथी आसारी ताकत हो तिथी जाति तोड़ी के ब्याह करने वालेयां जो सुरक्षा देणी चहिए। जेता जो समाज प्रतिष्ठा रे खत्म हुणे होर अपमाना रा मुद्दा मनहां तेता जो आसे गरिमा के स्थापित हुणे होर सम्माना रा मुद्दा बनाई सकहाएं। एता री एक सांस्कृतिक लैहर बनायी जाणी चहिए। जाति तोड़ो सामूहिक भोज आयोजित किते जाणे चहिए। सामाजिक उत्पीड़ना रे विभिन्न रूपा रे खिलाफ जबरदस्त सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा कितेया जाणा चहिए। आजा रे समकालीन समया री घटनावां रे बारे बिच वर्ग आधारित एकता रे गीत बणाये जाणे चहिए।

सभी थे महत्वपूर्ण मांग जे आसारी हुणी चहिए से ये ही भई जेहड़ा ग्रामीण बेरोजगारा कठे रोजगार देणा सरकारे संवैधानिक तौरा पर आपणी जिम्मेवारी मनी लितिरी। इधी कठे आसा जो सार्विक अधिकारा रे तौरा पर मांग करनी चहिए भई शिक्षा व्यवस्था बिच सभी कठे समान होर निःशुल्क शिक्षा हो। शिक्षा होर रोजगारा कठे संविधाना बिच संशोधन करूआं यों मूल अधिकार बिच लयाउणे चहिए। एता कठे आंदोलन करने जो बड़ा फ्रंट बनाणा चहिए सभी युवा-छात्र संगठना होर जाति विरोधा फोरमा रा। हालांकि कई पूँजीवादी देशा बिच यूनिफार्म स्कूल सिस्टम लागू हा। भारता बिच जेबे सभ समान हे ता 10 तरहा रे सरकारी स्कूल कि हे प्राइवेटा री ता गल्ल हे रैहण देयो। एक किस्मा रा सरकारी स्कूल देयो, एक हे पाठ्यक्रम देयो ताकि अमीर, गरीब, दलित, ब्राह्मणा रे बच्चे एकी स्तरा पर पढ़ी सको। एक स्तर आर्थिक होर अधिसंरचना रे तौरा पर बी हुणा चहिए। यानि केसी स्कूला ता बौहत बढ़िया टीचर हे, स्विमिंग पूल बी हा, बास्केटबाल कोर्ट बी हा यानि सब कुछ हा पर केसी स्कूला ब्लैकबोर्ड नीं हा, बाथरूम, पीणे रा पाणी नी हा जिथी गरीब होर दलित आबादी पढ़दे जाहीं। क्या ये सीधा-सीधा जाति विरोधी आंदोलना रा मुद्दा नीं बणदा। यूनिफार्म स्कूल सिस्टमा के निश्चित तौरा पर जाति व्यवस्था पर चोट हुणी। एता ले अलावा शहरी रोजगार गारंटी कानूना कठे अभियान शुरू कितेया जाणा चहिए। क्योंकि आजकाला रे मौजूदा दौरा बिच बेरोजगारी री दर बौहत ज्यादा बधदी जाई करहाईं। एक मांग होर किती जाणी चहिए स्टेट हाउसिंगा री। रिहायशी पार्थक्य एता के हे टुटणा। लोका जो मकाना रा मालिकाना नीं देयो पर तिन्हा री रिहायशी रा प्रबंध कितेया जाणा चहिए। हालांकि आसौ पता हा भई एस पूँजीवादी व्यवस्था बिच यों मांगा पूरी नीं हुणी पर आसे एहडी मांगा तेबे बी उठाहें क्योंकि आसे पूँजीवादी वायदेयां जो अति अभिज्ञान यानि ओवर आइडेंटिफिकेश देहाएं। आसे बोल्हाएं भई एभे तुसे इन वायदेयां रे बारे बिच बोली देतिरी इधी कठे आसारी मांगा जो पूरी करा। अगर आसा बाले ताकत हो ता आसे सड़का पर आंदोलना के इन्हां मांगा जो मनवाणे कठे सरकारा पर दबाब बनायी सकाहें। पर एस ताकता जो हासिल करने कठे संगठना जो विकसित करने री जरूरत हुआईं। स्टेट हाउसिंग, सभी कठे समान शिक्षा होर रोजगारा सरीखे यों मुद्दे उठघे ता जाति रा मुद्दा भौतिक रूपा ले बडा मुद्दा बणी जाणा। तेबे जाति रा मुद्दा सिर्फ मूर्ति टुटणे होर यूनिवर्सिटी रा नावं बदलणे तका रा मुद्दा हे नी रैहणा। दूजी गल्ल एता के आसा जो मौका मिलणा भई जनता री गैर दलित आबादी बिच जे जातिगत पूर्वाग्रह हे तिन्हारे खिलाफ संघर्ष कितेया जाई सको। हर आंदोलना बिच जाति रे प्रश्न एजेंडे बिच ल्याउणा चहिए। होर एता रे खिलाफ लगातार प्रचार करना चहिए। जातिगत मैटरीमोनियला रे खिलाफ बी लगातार आंदोलन, प्रचार होर चोट करनी चहिए। यों कुछ मुद्दे हे पर ये एक पूरी सूची नीं ही एता बिच होर भौतिक मुद्दे बी जुडी सकाहें।

इन्हा मुद्देयां पर वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलन खड़ा कितेया जाए ता एहड़ी एकता पैदा करी सकाहीं जे क्रान्तिकारी गोलबंदी होर संगठना के आसा जो अग्गे क्रान्ति री मंजिला तका पौहंचायी सकहां होर बिना क्रान्ति के जाति उन्मूलन नीं हुई सकदा। क्रान्ति ले बाद बी एकदम जाति उन्मूलन नीं हुई जाणा। समाजवादी क्रान्ति हुई बी जाओ ता जाति पर सभी थे बड़ी चोट ये हुणी भई तुरंत हे राज्या रे अधीन सामूहिक किसानी हुई जाणी होर सारी जागीरा भंग हुई जाणी। सारे स्वर्ण बड़े भूस्वामी री जमीना छीनी लेती जाणी होर स्टेट फार्मिंग या सामूहिक फार्मिंगा बिच तब्दील हुई जाणी। स्टेट फार्मिंगा ले दलित, शुद्र होर गरीब जनता जो तिथी काम मिलणा। मजदूर खेता बिच छैह घंटे काम करघा, फेरी घरा जाईके बच्चेयां जो प्यार करघा, धूमदे-फिरदे जांघा, फिल्मा देखघा, सभ कुछ करघा। क्योंकि तेबे तेस बाले पूरा वक्त हुणा। भूमीहीनता होर आर्थिक असमानता जातिगत उत्पीड़ना जो टिकाई रखाहीं। जाति रे कुछ मामलेयां पर ता समाजवादी क्रान्ति तुरंत हे भयंकर चोट करी देणी। सारी जमीना, सारे कारखाने, खदाना होर निजी बैंका रा राष्ट्रीयकरण हुई जाणा। जेता के जातिगत विभेद जो चोट पौंहचणी। जातिगत मानसिकता री जमीन ही शारीरिक श्रम होर मानसिक श्रमा मंझ अंतर। एता रे अलावा गांव होर शैहरा रा अंतर होर उद्योग होर कृषि रे अंतरा के बी असमानता बणहाईं समाजा बिच। समाजवादी क्रान्ति ले बाद लंबे समया तक चलने वाले कई सांस्कृतिक आंदोलना रे जरिये ये असमानता होर अंतर खत्म हुणे। जाति जो जड़ ले खत्म करने कठे समाजवादी समाजा जो 100 साल बी लगी सकाहें तेबे जाई के ये खत्म हुणी। प्रसिद्ध इतिहासकार सुविरा जायसवाल बोल्हाईं जाति निजी संपति पितृसत्ता होर वर्गा के सौगी पैदा हुई थी होर जाति निजी संपति पितृसत्ता होर वर्गा रे सौगी हे खत्म हुई सकाहीं। पूरी तरह के जाति रा समाप्त हुणा एक समाजवादी समाजा मंझ हे संभव हा। पर क्रान्ति करने कठे एक वर्ग आधारित जाति विरोधी आंदोलन आजा ले ही खड़ा करना पौणा जे सड़का पर लड़ने री ताकत रखदा हो। सही दिशा ये ही।

(ये लेख मजदूर बिगूल अखबारा रे संपादक अभिनव सिन्हा रे यू टयूब लैक्चरा ले लितिरे नोटस पर आधारित हा।)