Sunday, September 18, 2016

तितरे दी पूछ

सलमान मासाल्‍हा


सलमान माासाल्‍हा हिब्रू कनै अरबी दूईं जबानां च लिखणे आळा हिब्रू कवि है। 
मैं इन्‍हां दियां कुछ कवतां दा अंग्रेजिया ते हिंदिया च अनुवाद कीत्‍तेया। 
तिन्‍हां चा ते इक्‍की कवता दा तेज सेठी भाई होरां प्‍हाड़िया च अनुवाद करी ता।
 इस अनुवादे दा नंद तुहां भी लेया। 
दयारे दिया रीता जो कायम रखदेयां होयां प्‍हाड़ी हिंदी कनै अंग्रेजी तिन्‍नो रूप तुहां पढ़ा। 



तितरे दी पूछ

मेरेयां लिब्बड़ां च है इक्क छड्डे:या वतन

अपणेयाँ मूँहन्डेयाँ ते झाड़दा कणका दीयां बाळीयाँ

सै: जे सच्चीय्यीयाँ ति:दे सिरे देयाँ बाळां नै

जैतून्ना देयाँ झुड़ेयाँ च

किरसाण यादां दे हळ बाह्न्दा

कनै वसारी छड्डदा जंगलां देयाँ पंछीयाँ दी तांह्ग

अन्ने देयाँ दाणेयाँ दी खातिर

प्हाड़ी गोलमटोळ पत्थराँ दीयां ह्थ्याळीयाँ प्राह्लैं

टपकण भ्यागसारे दे बद्दळ

रिढ़ियाँ नै चारसूं जकोह्यो

शकारी आत्मसमरपणे ते मना: करदा

गुद्दड़गाळ्याँ नै भरेह्या अपणा झोळा

कनै हड़ोस्सदा तिस्च तितरे दीया पूच्छा

जां जे लोक समझी जाह्न

भई सै: है जबरजस्त शकारी।

प्‍हाड़ी अनुवाद : तेज कुमार सेठी  


तीतर की पूंछ
मेरे होठों में है एक छोड़ा हुआ वतन
अपने कंधों से झाड़ता गेहूं की बालियां
जो चिपक गईं उसके सिर के बालों से
जैतून के झुरमुट में
किसान यादों का हल चलाता है
और बिसर जाता है जंगली पंछियों की आरजू
अन्‍न के दानों के लिए
पहाड़ी गोल पत्‍थरों की हथेलियों पर
टपके भोर के बादल
पहाड़ियों से चारसूं दबे हुए
शिकारी आत्‍मसमर्पण से मना करता है
गूदडो़ं से भर लेता है अपना झोला
और खोंसता है उसमें तीतर की पूंछ
ताकि लोग समझ जाएं
वो है जबरदस्‍त शिकारी।
हिंदी अनुवाद : अनूप सेठी 



PARTRIDGE TAIL

In my lips an abandoned homeland.
Shaking grains of wheat from her shoulders
that stuck to hairs of her head.

Among the olive groves
the peasant draws furrows of memory.
And forgets the longing of the wild birds
for grain.

On the palms of the mountain boulders
the morning clouds dripped
pressed from all sides by the hills.

The hunter, refusing to surrender,
fills his bag with ragged clothes.
And sticks a partridge tail among them
so people will know
that he is an excellent hunter.
Poem by Salman Masalha, translated by Vivian Eden
 

9 comments:

  1. अरविन्द कार्टूनिस्ट
    Shandaar bemisaal

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  2. नरेंद्र सिंह
    पहाड़िया च अनबाद कामयाब रह्या. असल दे बक्खे बक्खे. इस पर्यासा ताइं बधाई.

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  3. नरेंद्र सिंह
    पहाड़िया च अनबाद कामयाब रह्या. असल दे बक्खे बक्खे. इस पर्यासा ताइं बधाई.

    ReplyDelete
  4. [9/18, 10:01 PM] Sushil Pathania: तुसां दा अनवाद बडा छैळ....
    जे तुसां
    बाळिआं दी ठाहरी 'सिल्ले'
    कनें अन्ने दी.ठाहरी ''न्नाज'
    लिखन तां होर छैळ लगणां....
    .....
    गलतीआ तांई...
    [9/18, 10:01 PM] Sushil Pathania: अनुप भाई जी..
    [9/18, 10:05 PM] Sushil Pathania: जबरजस्त........बड्डा भारी
    [9/18, 10:05 PM] Sushil Pathania: भी होई सकदा...

    ReplyDelete
  5. [9/18, 10:01 PM] Sushil Pathania: तुसां दा अनवाद बडा छैळ....
    जे तुसां
    बाळिआं दी ठाहरी 'सिल्ले'
    कनें अन्ने दी.ठाहरी ''न्नाज'
    लिखन तां होर छैळ लगणां....
    .....
    गलतीआ तांई...
    [9/18, 10:01 PM] Sushil Pathania: अनुप भाई जी..
    [9/18, 10:05 PM] Sushil Pathania: जबरजस्त........बड्डा भारी
    [9/18, 10:05 PM] Sushil Pathania: भी होई सकदा...

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  6. अनूप भाई जी

    छैळ कविता चुणियो। बोह्त बधिया अनुवाद ऐ। मजा आइय्या
    सुशील जी सिल्ले कने न्नाज ठीक दस्सा दे।

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    1. द्विजेंद्र भाई जी धन्‍नवाद। सुशील होरां दे सुझाव ठीक ई लगा दे। प्‍हाड़िया च अनुवाद तेज भइयां कीत्‍तेया। तिनहांं दी रजामंदी जरूरी है।

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  7. विनोद भावुक
    बेहतरीन

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  8. विनोद भावुक
    बेहतरीन

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