पहाड़ी भाषा दी नौई चेतना .

Wednesday, September 5, 2012

हिमाचली हाइकु






१ लोम्बी कोयड़   
धारो बाजी बाँसरी 
आया शावणु |

२ होसदे फूल
झुमयो नाचो खूब
सायाला कूल |

३झाड़ो फाड़ोली
कूटड़े बाठिया जू
सेजी बूणो न |

४ तेरे माथे दा
टिकड़ू ढोबोला हाँ
चाला गोयणी |   

५ तारे गोयणी
तेरे झोगे खे ल्याऊं
टुम्बो चादों री |

६ ढोली देसो तू
सुपने आयन्दी मू
चिते न कोरी |

दिवे प्यारो रे
हवा दे बोलो त्यूं त्यूं
तू राखी तेल |

चोमासा आया
दोउड़े खाले नाले
हाँ जितुं के तू |

फील पावणी
तारामंडल घोर
रूजी शावणी |

१० होरी देई दे
जोख्मो गोयरे रिसो
बोगदी नोदी |

११ फोए रुई रे
डाली घारी दे पिंगो
हुड़िये  पोण |

१२ शाड़ उगलो
गोंडुये रो फिफड़ी
घास उबलो |

१३ जवान बूण
चिड़ी रोजी मिरगो
खावंदा कूण |

१४ बादलो फिरी
ढ़ूंडो जांगलो शुकी
तोबे रुजुओ |

१५ ढ़ूंडी न भेटो
घोरो कोयड़ पोड़ी
गोयण  धुम |


१६ बोलो बादलो
भागो छेड़ुओ भागो
बोंदी काजलो |

१७ धारो बाँसरी
नेउलो गंगी शुणो
खाले बे गांदे |

१८ हाथो दी दाची
कोमरो गाची चाली
प्वाड़ो री धीयो |

१९ निछ्ला जियो
खानों खे धिणु प्वाड़ी
पिणो खे घियो |

२० मोनो हिरिणा
मारो चोकड़ी बेगे
आई जवानी |

२१ शाड़ो शावणो
बारो  त्वारो री झोड़ी
जामे गोंडुए |


२२ लागदे शाड़ो
धुणिये नालो रो
भोरिये खाड़ो |

२३ आया चोमासा
चिचलो गोंडुये रा
लागा तमाशा |

२४ चालो पावणे 
शाशु मिलो न बोऊ
ऐसी शावणे |

२५ लुम्बिए लुम्बी
कोयड़  लांबी झोड़ी
आया शवणो |

२६ होरिये होरे
बाग बोगिचे होसे
आया शवणो |

२७ मिरगो बोलो
हामे मुटिये बेगे
आफरी कोलो |


२८ डाली घारी रे
जोख्मो भोरे मुटिये
आपणे घोरे |

२९  ओटा सूरज
पश्चित दा जोबे बे
डूबा ई डूबा |

३० राजा फोलो रा
खाजा गोलो रा मीठा
चुशियो कोरी |

अनंत आलोक



4 comments:

  1. तुसां दी प्‍हाड़ी भासा दा स्‍वाद कने स्‍वर दूहीं दी मिठास मजा आई गिया। ऐसा कुछ भी नी लगा जैड़ा समझा नी आया हो। अनंत जी मती मती बधाई।

    ReplyDelete
  2. ओटा सूरज
    पश्चित दा जोबे बे
    डूबा ई डूबा |

    ek se badh kar ek

    ReplyDelete
    Replies
    1. श्रद्धेय कुशल जी मिंजो मती खुसी होई जे तुहांजो सारे हाइकु पसंद आई गे | तुहान्दा स्नेया बनया रेन |

      Delete
    2. आदरणीय भाई द्विज जी आपका हिमाचली प्रेम प्रशंसनीय है हार्दिक आभार |

      Delete